खींवसर थाना इलाके में एक युवक की हत्या करने के बाद उसके शव को ईशरनावड़ा गांव के पास पटकने की वारदात में एक परिवार के 5 सदस्यों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का मामला पीएचक्यू तक पहुंचने के बाद जांच से जुड़ी एजेंसियां हरकत में आ गई हैं। इसके लिए विजिलेंस की टीम सोमवार को नागौर पहुंची। इस दरम्यान टीम सदस्यों ने कई लोगों से पूछताछ करने के साथ कई तथ्य भी जुटाए हैं।
इसके बाद विजिलेंस की टीम श्रीबालाजी थाने में पहुंची और वहां भी अधिकारियों एवं पुलिस कार्मिकों से पूछताछ के साथ तथ्य जुटाएं। बताया गया कि रात तक टीम अनुसंधान में जुटी रही। उल्लेखनीय है कि अब इस प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारियां एवं अनुसंधान की प्रक्रिया डीजी क्राइम की निगरानी में ही चलेगी। इससे प्रकरण की जांच किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हो सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोप है कि खींवसर मर्डर प्रकरण में कोतवाली थाना प्रभारी संदिग्धों को हिरासत मेंें रखकर पूछताछ कर रहे थे। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कोतवाली सीआई की ही अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके अलावा कई आरोप भी लगाए थे। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी रामनारायण भंवरिया का पहले अजमेर रेंज से बाहर, कोटा रेंज में स्थानांतरण हुआ, लेकिन भंवरिया कई दिनों तक यहां से नहीं गए।
इसके बाद 19 सितंबर को पुलिस अधीक्षक ने रामनारायण भंवरिया को कोतवाली थाने के कार्य से मुक्त करते हुए तत्काल अजमेर रेंज कार्यालय के लिए यहां से रवानगी के आदेश जारी किए। जोधपुर के औंसिया विधायक दिव्या मदेरणा के साथ पीएचक्यू पहुंचे पीड़ित राजू राम व बीरमाराम ने पूरा मामला डीजी के समक्ष बताया था। उन्होंने बताया कि हत्या के मामले में उनको कोतवाली थाना प्रभारी श्रीबालाजी थाने लेकर गए और वहीं पर उनके साथ मारपीट की गई और हिरासत में रखा।
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