छठी कक्षा में संगीता की उछलकूद को देख कोच ने सिखाया जिम्नास्टिक, बेटी की लगन देख पिता उसकी स्कूल में बने ड्राइवर
22 साल की संगीता ने छठी कक्षा में स्कूल से जिम्नास्टिक खेलना शुरू किया और पहले ही साल नेशनल टूर्नामेंट सब जूनियर सिल्वर मेडल जीतकर पिता रामभरोस का भरोसा कायम किया। पिता ने अपनी लाडली की मेहनत और लगन को देख उसी की स्कूल में ड्राइवर की नौकरी शुरू कर दी।
संगीता के इसी टेलेंट की बदौलत नीता अंबानी फाउंडेशन ने शिक्षा और खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए टीवी विज्ञापन में जगह दी। राज्य सरकार ने दो साल तक करीब ढाई लाख रुपए की स्कॉलरशिप दी। अभी संगीता जोधपुर में जिम्नास्टिक कोच भवानीसिंह के पास जिम्नास्टिक की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की बारीकियां सीख रही हैं।
नागौर के मूंडवा की रहने वाली संगीता ने स्कूली शिक्षा मूंडवा की वीर तेजा महिला शिक्षण संस्थान से की। यहां पर संगीता छठी कक्षा में थी तो उसकी कोच शीला दत्ता ने उसे पेड़ों पर लटकता और उछलकूद करते हुए देख पैरेंट्स से जिम्नास्टिक गेम में डालने को बोला। संगीता ने कोच शीला से बहुत कुछ सीखा और पहले ही साल में चंडीगढ़ में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता।
संगीता की इस उपलब्धि को देख पिता रामभरोस इतने गदगद हुए कि उसी स्कूल में स्कूल प्रिंसिपल की गाड़ी चलाने का काम शुरू कर दिया। पांच साल तक गाड़ी चलाने के बाद जब संगीता की पढ़ाई पूरी हो गई तो वे खेती करने लगे और संगीता जोधपुर में रहकर प्रतियोगिताओं की तैयारी करने लगी। संगीता ने एमए हिंदी पंजाब विवि से किया और चंडीगढ़ में इंटर यूनिवर्सिटी कंपीटिशन में पहली बार पंजाब विवि के लिए टेबल वॉल्ट में सिल्वर मेडल हासिल किया।

3 साल से सीनियर वर्ग में राजस्थान की चैंपियन हैं संगीता
संगीता जोधपुर का प्रतिनिधित्व करते हुए पिछले तीन साल से लगातार सीनियर वर्ग में राजस्थान की चैंपियन हैं। इसके अलावा इसी साल जनवरी माह खेलो राजस्थान में ब्रांच मेडल हासिल किया था।
पिता रामभरोस ने कहा- लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देता
संगीता के पिता रामभरोस बताते हैं कि शुरुआत में बच्ची की कॉस्टयूम को लेकर समाज और परिवार के कई लोगों ने विरोध जताया, लेकिन बेटी की उपलब्धियां को देखते हुए हमने उनको समझाइश की तो कई समझ गए और जो लोग बोलते हैं मैं उनकी तरफ ध्यान नहीं देता।
टेबल वॉल्ट की बेस्ट खिलाड़ी
- संगीता के कोच भवानीसिंह बताते हैं कि संगीता टेबल वॉल्ट की बेस्ट खिलाड़ी हैं। इसके अलावा फ्लोर, बीम में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी हैं।
- संगीता की कोच शीला दत्ता का कहना है कि बचपन से इसमें जीतने का जुनून था। इसी जुनून की बदौलत आज राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 14 से अधिक मेडल जीते हैं।
- खिलाड़ी संगीता का कहना है कि वे ओलिंपिक की तैयारी कर रही है। इसके लिए वे अभी राजस्थान पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रही है। ताकि खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।
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