कोरोना मरीजों में इजाफा होने की वजह से ऑक्सीजन की मांग बढ़ने की वजह से दो सप्ताह से चल रही कमी अभी तक बरकरार है। मांग की अपेक्षा 60 से 70 प्रतिशत तक की ऑक्सीजन की आपूर्ति होने की वजह से अब भाव भी 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। एक सप्ताह पूर्व 300 से 500 रुपए का हुआ सिलेंडर अब 50 प्रतिशत इजाफे के साथ 750 रुपए का हो गया है।
कमी को देखते हुए अब औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य सरकार के निर्देश पर जिले में ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिति की मॉनिटरिंग करना शुरू कर दिया है। सहायक औषधि नियंत्रक डीएस उप्पल के अनुसार शुक्रवार को ऑक्सीजन के स्थानीय मैन्यूफ्रेक्चर ने अपने प्लांट से 68 सिलेंडरों की सप्लाई की है। अभी तक
ऑक्सीजन की बिलकुल किल्लत की स्थिति नहीं बनी है। अस्पताल संचालकों के अनुसार इन दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा है। सांस के रोगियों को भी एहतियात के तौर पर ऑक्सीजन लगाने की जरूरत पड़ती है। इससे ऑक्सीजन की खपत बढ़ी है। उन्हें सिलेंडरों की रीफिलिंग हाथोंहाथ नहीं मिल रही है। चार से पांच दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, 10 सिलेंडरों की रीफिलिंग की मांग करने पर 6 से 7 की ही आपूर्ति होती है। अभी तक अस्पतालों में सामान्य
ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। ऑक्सीजन की जरूरत वाले नए मरीजों को भी भर्ती करने से गुरेज किया जा रहा है। प्राइवेट नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संदीप चौहान के अनुसार अगर
जिले का कोटा फिक्स हो जाए तो ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित होने से संशय की स्थिति टल सकती है। पूर्व में प्राइवेट नर्सिंग होम एसोसिएशन ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों का
इलाज प्रभावित होने के बारे में अवगत करवाया था। तब सीएमएचओ डॉ. गिरधारी लाल मेहरड़ा ने आश्वस्त किया था कि अलवर के भिवाड़ी स्थित ऑक्सीजन जनरेट प्लांट से जिले का कोटा निधार्रण करवाया जाएगा। लेकिन जिले कोऑक्सीजन की कमी झेलते हुए एक सप्ताह हाे चुका है, अभी तक कोटा निर्धारित नहीं हुआ है। श्रीगंगानगर जिले में ऑक्सीजन की सप्लाई हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के प्लांटों से होती है। वहां राज्य सरकारों ने पहले गृह
राज्य की आपूर्ति करने के बाद ही अतिरिक्त आपूर्ति अन्य राज्यों को देने की शर्त लगा रखी है। इसके चलते बाहर से मांग की अपेक्षा आपूर्ति नहीं हो रही है। जो कमी का प्रमुख कारण है। सहायक औषधि नियंत्रक डीएस उप्पल के अनुसार राज्य के औषधि नियंत्रक को ऑक्सीजन की कमी की तथ्यात्मक रिपोर्ट भेज दी गई है। जिले का कोटा निर्धारित करवाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पड़ोसी राज्यों की आपूर्ति पर निर्भर न रहना पड़े।
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