30 लाख रुपए जमा कराने जा रहे युवक की डीसी ऑफिस से एक फर्लांग दूर चाकू से गोदकर हत्या,निजी वाहन से एमबी हाॅस्पिटल पहुंचाया गया, जहां शाम करीब 6 बजे उसने दम तोड़ दिया
संभागीय आयुक्त कार्यालय से महज एक फर्लांग दूर एक्सिस बैंक के पास साेमवार सुबह सवा 11 बजे तीन बदमाशाें ने अमित सिंह पुत्र विजेंद्र सिंह सांखला को चाकुओं से गोद दिया। तीतरड़ी में अंबा घाटी निवासी 22 वर्षीय अमित राइटर सेफ गार्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कर्मचारी था। उसके पास ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के कलेक्शन के 30 लाख रुपए थे। वह यह रकम जमा करवाने ही बैंक जा रहा था।
लहूलुहान हालत में वह घटना स्थल से 100 फुट दूर एक्सिस बैंक पहुंचा और परिचित की मदद से रुपए जमा कराए। फिर उसे निजी वाहन से एमबी हाॅस्पिटल पहुंचाया गया, जहां शाम करीब 6 बजे उसने दम तोड़ दिया। इससे पहले एएसपी सिटी गाेपाल स्वरूप मेवाड़ा, डीएसपी महेन्द्र पारीक सहित अन्य अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे।
पुलिस ने घटना स्थल, बैंक सहित दूसरी जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, जिसमें हमलावर तीन युवकों का बाइक पर आना सामने आया है। हालांकि ये पता नहीं लग पाया है कि ये तीनों कौन हैं। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर फरार अभियुक्तों की तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल लूट और रंजिश में हमले के नजरिए से जांच शुरू की गई है।
साहस : लहूलुहान होकर भी नहीं छोड़ी हिम्मत, 100 फुट तक भागते-लड़खड़ाते बैंक में सौंपा कैश
पेट, सीने और पीठ पर चाकू के वार भी अमित की हिम्मत पस्त नहीं कर पाए। खुद काे हमलावरों से जैसे-तैसे छुड़ाकर वह लहूलुहान हालत में दाैड़ते-लड़खड़ाते बैंक तक पहुंचा। घटना स्थल पंचवटी मार्ग से एक्सिस बैंक की दूरी करीब 100 फुट है। बैंक पहुंचते ही वह बैंच पर जा बैठा। उसे इस हालत में देख अफरातफरी मच गई। स्टाफ ने उसे पानी पिलाया। तब अमित की कंपनी से जुड़ा एक परिचित वहीं था, जिसने राशि जमा कराई।
बैंक कर्मियों ने अमित के साथी कर्मचारियों को फोन पर हालात बताए, जिन्होंने कॉल कर उसके जीजा मोहनसिंह को बैंक पहुंचने को कहा। फील्ड में ही काम करने वाला मोहन सिंह ज्यादा दूरी पर नहीं था। वह अमित को अपने वाहन से एमबी हाॅस्पिटल ले गया, जहां हाथीपाेल पुलिस ने बयान लिए। अमित ने बताया कि कैश जमा कराने गया था। बाइक खड़ी करते ही तीन युवकों ने हमला कर दिया। शायद वे रुपए लूटने ही आए थे।
चाकू के वार से हृदय और उसके पास ही बड़ी रक्त वाहिनियां फटने से मौत
एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने बताया कि अमित को 12.25 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। जांच के बाद उसे 12.59 बजे कार्डियोलॉजी विभाग के कार्डियोथोरेसिक वार्ड में भर्ती किया गया। उसकी छाती और पेट पर चाकू के दो गहरे घाव थे। छाती के दांई तरफ चाकू के वार से हृदय और उसके पास ही बड़ी रक्त वाहिनियां फट गई थीं। ज्यादा खून बहने से उसकी मौत हो गई।
सेवानिवृत्त पिता का इकलौता सहारा था, 3 सितंबर काे मनाया था 22वां जन्मदिन
अमित के पिता जावर माइंस के विजेंद्र सिंह सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। तीन बहनाें में अमित सबसे छाेटा था। गत 3 सितंबर काे ही उसने अपना 22वां जन्मदिन मनाया था। साेशल मीडिया पर कई दाेस्ताें ने उसे बधाइयां भी दी थी। परिवार सदस्याें काे देर रात तक अमित की माैत के बारे में नहीं बताया गया। मंगलवार सुबह पाेस्टमार्टम हाेगा।
साेशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था- मेरा मिशन सिर्फ जिंदा रहना नहीं, रोमांचित करना है...
अमित ने अपनी 29 अक्टूबर की साेशल मीडिया की पाेस्ट में लिखा था कि जीवन में मेरा मिशन सिर्फ जिंदा रहना ही नहीं है, बल्कि रोमांचित करना है, कुछ जुनून, कुछ करुणा, कुछ हास्य, कुछ शैली के साथ रहना है।
अमित ने कहा था- पहचानता हूं उन्हें
बैंककर्मी रवि ने पुलिस काे बताया कि सभी कर्मचारी रुटीन के काम कर रहे थे। ग्राहकों की अावाजाही भी थी। एकाएक गेट के पास शोर मचा। ऐसा लगा कहीं कोई काेराेना रोगी तो नहीं आ गया। फिर पता चला कि युवक घायल है। लोगों से घिरे जख्मी अमित ने कहा था कि हमला करने वालों के नाम नहीं जानता, चेहरे पहचानता हूं।
कैश लेकर 8 किमी दूर तक चला, बैंक के पास ही क्यों हुआ हमला?
पुलिस अब यह पड़ताल कर रही है कि वारदात लूट के लिए हुई या किसी रंजिश में। लूट के पहलू पर सवाल यह है कि अगर मकसद यही होता ताे बदमाश पहले बैग छीनने की काेशिश करते। एक वार बैग पर भी हुआ, जिससे कुछ नोट फटे और इन पर भी खून लगा।
दूसरा सवाल यह कि अमित के सेक्टर-14 से घटना स्थल तक पहुंचने के दौरान करीब 8 किमी दूरी में कई सुनसान रास्ते आए, लेकिन वहां हमला नहीं हुआ। अमित की कंपनी एटीएम में नकदी डालने और निजी कंपनियाें का कलेक्शन फंड बैंक में जमा कराने का काम करती है।
अमित सुबह 10.53 बजे सेक्टर-14 में 100 फीट राेड स्थित आकाशगंगा कॉम्प्लेक्स के पास ऑनलाइन चीजें बेचने वाली कंपनी के ऑफिस से कलेक्शन के रुपए लेकर निकला था। वह 11.15 बजे पंचवटी मार्ग पर उपकार स्टाेर के पास पहुंचा, जहां हमला हुआ।
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