3 साल बाद कचरे से बिजली उत्पादन की फाइल चली,10 दिन बाद ही जमीन का विवाद खड़ा हुआ

जयपुर शहर से निकलने वाले कचरे से बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट पर तीन साल बाद नगर निगम और कंपनी के बीच में काम करने की सहमति बनने के दस दिन बाद ही फाइल डीएलबी तक पहुंची ताे कंपनी ने फिर से हाथ खड़े कर दिए। दरअसल प्लांट चलाने के लिए कंपनी सरकार की ओर से आवंटित हाेनेे वाली जमीन पर लाेन लेकर काम शुरू करना चाहती है। लेकिन कंपनी की इस शर्त पर निगम के अधिकारी सहमत नहीं है।

जबकि दस दिन पहले कंपनी ने टैंडर की शर्ताें के आधार पर तीन साल बाद निगम के साथ वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का काम शुरू करने की सहमति दे दी थी। अब निगम के अधिकारी कंपनी के पदाधिकारियाें काे मनाने में लगे हुए है। कचरे का निस्तारण हाेने और प्लांट शुरू हाेने से स्वच्छता सर्वेक्षण में जयपुर शहर की रैंकिंग सुधरेगी।

700 टन कचरे से 12 मेगावाट बिजली बनाने का टारगेट
पड़ताल में सामने आया कि शहर में प्रतिदिन औसतन बीवीजी कंपनी द्वारा करीब 1400 टन कचरा एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन शुरूआती तौर 700 टन कचरे से 12 मेगावाट बिजली उत्पादन का टारगेट तय किया है। इसके लिए लांगडियावास में करीब 20 हेक्टेयर जमीन पर 182 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट का निर्माण होगा। इससे गंदगी से मुक्ति मिलेगी।

कंपनी से फिर बात करेंगे

  • कंपनी ने पहले सहमति दे दी थी। लेकिन फिर से एक छाेटे से जमीनी इश्यू काे लेकर कंपनी तैयार नहीं हाे रही है। ऐसे में कंपनी के पदाधिकारियाें काे वापस बात करने के लिए बुलाया है। ताकि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का काम जल्द शुरू हाे जाए। बातचीत करके समस्या का समाधान करेंगे। - दिनेश यादव, सीईओ, नगर निगम ग्रेटर जयपुर


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फाइल फोटो


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