कलेक्ट्रेट पर हल्ला बोल; किसानों ने सभा कर जुलूस निकाला 25 को भारत बंद और प्रमुख मार्गों पर चक्का जाम का ऐलान

तीन विधेयकाें के विराेध में साेमवार काे किसानाें, व्यापारियाें और मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर धरना दिया और महासभा की। केंद्र की भाजपा नीत सरकार की ओर से किसानाें की फसलाें के अधिकतम भाव दिलवाने के दावे के साथ पास किए गए इन विधेयकाें काे काला कानून बताते हुए तीनाें वर्ग के सदस्याें ने प्रदर्शन किया। महासभा में निर्णय लिया है कि 25 सितंबर काे बंद के देश व्यापी आह्वान काे सफल बनाते हुए जिले के सभी राष्ट्रीय,राज्य और जिला मार्गाें पर चक्काजाम किया जाएगा। इसी घाेषणा के साथ दोपहर 3:30 बजे महासभा विसर्जित हा़े गई।
हाथाें हाथ लगाया गया टेंट, पुलिस का भारी जाब्ता और मजिस्ट्रेट भी तैनात रहे: धरना स्थल महाराजा गंगासिंह चाैक पर जैसे-जैसे किसानों की संख्या बढ़ती गई,वैसे वैसे टेंट का आकार भी बढ़ता गया। हाथाें हाथ किसान नेताओं ने ही वहां और लगवाया। सभी नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपना भाषण दिखा स्वयं का बखान भी किया। कानून व्यवस्था काे लेकर भारी संख्या में पुलिस जाब्ता माैजूद रहा। तीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट और तीन डीएसपी के साथ 10 थाना प्रभारी कलेक्ट्रेट और नई मंडी में तैनात किए गए।

कांग्रेस भी आई: कलेक्टर से अलग से मिले नेता, तीनाें बिलों के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम भेजा गया ज्ञापन

कांग्रेस ने कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा काे ज्ञापन साैंपा। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष पृथ्वीपालसिंह संधू, जगदीश जांदू, सुखविंद्रसिंह अाैर प्रवीण धींगड़ा सहित पार्टी नेताअाें ने तीनाें बिलाें काे किसान, व्यापारी अाैर मजदूराें के हिताें के खिलाफ बताया। ज्ञापन में राष्ट्रपति से बिलाें पर हस्ताक्षर नहीं करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा है कि नए कृषि कानून राजस्थान में लागू नहीं हाेने दिए जाएंगे। केंद्र सरकार ने बिल वापस नहीं लिए ताे पार्टी अांदाेलन करेगी।

आगे क्या: 25 को नेशनल हाइवे, राज्य व जिला मार्गों पर भी किसान करेंगे प्रदर्शन व जाम, तैयारियां शुरू

सभी वर्गाें ने एकजुट हाेकर आंदाेलन काे तेज करने का संकल्प लिया। 25 सितंबर काे इन्हीं कानूनाें काे वापस लेने की मांग काे लेकर भारत बंद की घाेषणा हा़े चुकी है। किसान संगठनाें, व्यापारिक और श्रमिक संगठनाें ने शुक्रवार काे प्रस्तावित भारत बंद के दाैरान जिले के सभी राष्ट्रीय,राज्य और स्थानीय मार्गाें पर चक्काजाम करने की घाेषणा की।

किसान पर असर
एक्ट लागू हाेने से फसलाें की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की नीति खत्म हा़े जाएगी। बड़े कार्पोरेट घरानाें की मनमर्जी चलेगी। फसलाें के दाम कम मिलेंगे। बड़े घराने अपनी मर्जी से फसलाें की खरीद करेंगे। किसानाें का शाेषण हाेगा।

व्यापारी पर असर

देशभर के साथ ही जिले के व्यापारियाें काे इस बात की चिंता है कि एक्ट लागू हाेने के बाद किसान मंडियाें में जिंस बेचने नहीं अाएंगे। इससे व्यापारियाें का काम शत प्रतिशत प्रभावित हाेगा अाैर उनका कराेड़ाें रुपए निवेश का काराेबार चाैपट हा़े जाएगा।



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Speak at the collectorate; Farmers gathered and took out the procession on 25th, closed India and announced the blockade on major routes


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