पुलिस पर फायरिंग करने के आरोप में पकड़ में आए राजू ठेहट गैंग के दो शातिर इनामी बदमाश विजय भार्गव और सोनू मीणा ने पुलिस पूछताछ में अहम खुलासा किया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि आनंदपाल गिरोह से जुड़े शक्तिसिंह को मारने के लिए साजिश जेल में बंद एक गैंगस्टर ने रची थी। इसके बाद उन्हें जयपुर में अवैध हथियार उपलब्ध करवाए गए थे, लेकिन योजना के तहत 28 जून की शाम को जब ये लोग शक्ति सिंह को रानोली में एक शादी समारोह में मारने वाले थे। इससे पहले ही दोपहर में इनकी पुलिस से मुठभेड़ हो गई और सारा प्लान धरा रह गया। गैंग में शामिल आधे साथियों को पुलिस ने पकड़ लिया, जबकि ये लोग मौके से भाग गए थे।
उद्योग नगर थाना अधिकारी पवन चौबे ने बताया कि आनंदपाल गिरोह से जुड़े शक्तिसिंह को मारने की योजना बनाने वाले अज्ञात गैंगस्टर का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा आरोपियों को जो शख्स जयपुर में बाईपास के पास हथियारों की सप्लाई देने आया था, उसकी पहचान भी कर ली गई है। पुलिस उसके नजदीक है। उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके अलावा पुलिस ने शक्ति सिंह की हत्या का षड़यंत्र रचने वाली गैंग में शामिल विजय भार्गव और सोनू मीणा के घर पर दबिश देकर तीन अवैध हथियार और बरामद किए हैं।
इनमें एक पिस्टल और देसी कट्टा आरोपी विजय भार्गव के मीलों की ढाणी में स्थित उसके कमरे में बनी लटान से बरामद किया है और चार कारतूस मिले हैं, जबकि सोनू मीणा के गांव भगासरा से उसके कमरे से एक देसी कट्टा और तीन कारतूस पुलिस के हाथ लगे हैं। गौरतलब है कि 28 जून को रानोली में शक्तिसिंह की हत्या के लिए विजय भार्गव ने विशेष तौर पर तीन शूटर बुलाए थे। उनमें एक हरियाणा का अजय, दूसरा हर्षवर्धन और तीसरा हर्ष नाम का शख्स था। इनमें पुलिस पर फायरिंग करने वाले संजय धायल, गुट्टू और हर्षवर्धन को पिस्टल, देसी कट्टा और एक एयर गन सहित गिरफ्तार कर लिया था जबकि हरियाणा-झज्झर निवासी अजय अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।
अपराध में कमाना चाहते थे नाम
शक्ति सिंह को मारने और पुलिस पर फायर करने वाले तीनों शूूटर हरियाणा का अजय और हर्षवर्धन तथा हर्ष छोटी उम्र में ही अपराध की दुनिया में नाम कमाना चाहते थे, इसलिए वे लोग विजय भार्गव की गैंग में शामिल हो गए थे। पुलिस के अनुसार अपराधी भी छोटी उम्र के युवकों को अपनी गैंग में शामिल कर रहे हैं, ताकि इन पर कोई शक नहीं कर सके। इनकी गैंग में शामिल कई गुर्गों की उम्र 17 साल से भी कम बताई जा रही है।
लोकल स्तर पर तैयार किए गए हैं हथियार
पुलिस की जांच में सामने आया है कि अब तक पकड़ में आए पांचों हथियारों को देखकर लगता है कि हथियार राजस्थान में कहीं लोकल स्तर पर तैयार किए गए हैं। क्योंकि इन हथियारों पर बनाने वाली कंपनी का नाम नहीं लिखा हुआ है। इनमें आरोपियों को तीन हथियार तो पांच महीने पहले ही उपलब्ध करवा दिए गए थे, जबकि दो हथियार बाद में सप्लाई किए गए हैं। वॉट्सएप कॉलिंग के जरिए सारा प्लान बनाया गया है। आरोपियों से बरामद मोबाइलों की जांच की जा रही है।
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