संविदा आयुष डॉक्टर बोले- मांग नहीं मानी तो देंगे इस्तीफा

पिछले सात दिन से कार्य बहिष्कार कर अपनी मांग पूरी होने का इंतजार कर रहे संविदा आयुष डॉक्टरों ने सोमवार को शहर विधायक मनीषा पंवार को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। साथ ही कहा कि यदि जल्द मांग पूरी नहीं हुई तो सभी आयुष डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा देंगे। इस पर शहर विधायक ने आयुष डॉक्टरों को ठोस आश्वासन दिया कि वे आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगी व चिकित्सा मंत्री से भी वार्तालाप करेंगी।
आयुष डॉक्टरों का मानदेय कम
आयुष संयुक्त संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि राज्य में 2 हजार संविदा आयुष डॉक्टर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत हैं। 3 साल से संविदा आयुष डॉक्टर अपनी मांगेें मनवाने के लिए प्रयासरत हैं।

सरकार ने आयुष डॉक्टरों को नियमित करने के काम को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया। साथ ही जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती, तब तक उनका मानदेय 2010 की भांति बढ़ाकर 39300 किया जाना बताया, लेकिन वर्तमान में आयुष डॉक्टरों का मानदेय मात्र 22180 है।

कोरोना वाॅरियर्स के रूप में काम
कोरोना रोकथाम के लिए आयुष डॉक्टर फ्रंटलाइन वॉरियर्स के रूप में कार्यरत हैं। संक्रमित कोरोना सर्विलांस रेपिड रिस्पाॅन्स टीम, सैंपलिंग मोबाइल ओपीडी आदि में अपनी जान जोखिम में डालकर राज्य हित में अल्प वेतन में निरंतर सेवाएं दे रहे हैं।

कई बार मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री, मुख्य सचिव सभी को आयुष डॉक्टरों की मांगों से अवगत कराया गया। चिकित्सा मंत्री ने मानदेय वृद्धि के लिए कमेटी का गठन किया और मांगों की अनुशंसा करके पत्रावली भेज दी, परंतु कार्यवाही नहीं हुई। सभी संविदा आयुष डॉक्टर अब पिछले 7 दिनों से कार्य बहिष्कार पर हैं।



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