हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को कहा है कि वह प्रदेश में विभिन्न रूटों पर औचक निरीक्षण कर अवैध तरीके से चल रहे वाहनों को जब्त कर उन पर भारी जुर्माना लगाए। साथ ही परिवहन सचिव व आयुक्त को कहा है कि वे इस संबंध में वाहनों के नियमित निरीक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी करें। वहीं अदालत ने मामले में परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों को अवमानना की कार्रवाई से मुक्त कर दिया। जस्टिस एसपी शर्मा ने यह निर्देश लाट साहब की अवमानना याचिका पर दिया।
अदालत ने कहा कि आमतौर पर यह देखने में आया है कि अनफिट बस संचालन के दौरान उनमें कई बार आग लग जाती है और इससे जान व माल की हानि होती है। ऐसे में परिवहन विभाग यह सुनिश्चित करे कि सड़कों पर कोई भी अनफिट बसें नहीं चलें। वहीं अदालत ने जयपुर-गंगानगर, जयपुर-उदयपुर, जयपुर-भरतपुर, अलवर-भरतपुर और पिलानी- जयपुर सहित अन्य मार्गो पर अवैध परिवहन रोकने के लिए औचक निरीक्षण कर उचित कदम उठाने को कहा है।
हालांकि अदालत ने माना कि परिवहन विभाग ने अवैध वाहनों पर कार्रवाई की है लेकिन इस बारे में अदालत का आदेश एक बार कार्रवाई के लिए नहीं होकर लगातार कार्रवाई के लिए है। अवमानना याचिका में कहा था कि लोक परिवहन सेवा के निर्धारित रूटों पर कई अवैध वाहन चल रहे हैं।
इससे न केवल प्रार्थियों को नुकसान हो रहा है बल्कि राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। पूर्व में भी अदालत ने अवैध वाहनों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन फिर भी कार्रवाई के नाम पर विभाग केवल खानापूर्ति ही कर रहा है। ऐसे में अदालती आदेशों की अवमानना करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
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