सावन का पहला दिन सोमवार और अंतिम दिन भी सोमवार। यानी पांच सावन के सोमवार के विशेष संयोग के साथ ही सावन का अंतिम दिन बित गया। अब मंगलवार से मेला-मगरियों व जागरण का महीना भादवा शुरू होगा। भादवा लगते ही बीकानेर जैसी धर्मनगरी में हर दिन एक से दो जागरण होते हैं जिसमें रात के समय हजारों जागरण प्रेमी पहुंचते है।
यही हमारी सांस्कृतिक विरासत है। मगर, इस बार ऐसा नहीं होगा। अभी तक सरकार द्वारा सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगा रखी है। हजारों लोगों का एकजगह पर एकजुट होना प्रतिबंधित है। ऐसे में इस बार जागरण की मस्ती रात को परवान नहीं चढ़ेगी। जागरण के प्रेमी निराश होंगे। जागरण प्रेमी राणा साहब बताते हैं कि वे निजी कंपनी में नौकरी करते हैं मगर भादव में बीकानेर आते ही है।
इस बार रक्षाबंधन पर आए हैं मगर जागरण नहीं होने की कसक मन है। सभी साथियों के साथ रात को जागरण में जाना बच्चपन से आदत बनी है मगर इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। सरकार को चाहिए कि जागरण की छूट मिले और उसका प्रसारण लाइव किया जाए। गायक कलाकार सुशील छंगाणी बताते हैं कि कलाकारों को पूरे साल की आमदनी इसी महीने में होती है।
ऐसे में सरकार को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जागरण की अनुमति देनी चाहिए। श्रोता भले ही ना आए, मगर उसके लाइव प्रसारण हो जिससे सदियों से चली आ रही परंपरा के साथ ही कलाकारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा ना हो।
सवा लाख शिवलिंग से बनाया राम मंदिर
अयाेध्या में भले ही पांच अगस्त को राम मंदिर का शिलान्यास हो लेकिन बीकानेर में तो राम मंदिर बनकर तैयार भी हो गया। यह राममंदिर पार्थिव शिवलिंगों से बनाया गया है। ये शिवलिंग सावन माह में बनाए गए। प्रत्येक दिन पांच हजार पार्थिव शिवलिंग बनाए गए। बाबा रामदेव पार्क के पास स्थित गुरुकृपा आश्रम में सावन मास में बनाए गए सवा लाख शिवलिंगाें से साेमवार काे राम मंदिर बनाया गया। इस मंदिर के ऊपर शिवलिंगाें से ही जय श्रीराम लिखा है। इस आश्रम में पंडित पवन छंगाणी, घनश्याम देराश्री, राधेश्याम, आनंद ओझा और संजय छंगाणी हर दिन पार्थिव शिवलिंग बनाने में जुटे रहे।
एक महीने से चल रहे पार्थिव शिवलिंग निर्माण की यज्ञ के साथ पूर्णाहुति
सावन के पहले दिन से ही लोग घरों व बगीचियों में सवा लाख पार्थिक शिवलिंग के निर्माण में जुट जाते हैं। प्रतिदिन इनका निर्माण करना और अभिषेक करते हुए क्वांरेंटाइन होना। यही सावन के महीने में चला। सोमवार को इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति हुई। कई बगीचियों व घरों में पूर्णाहुति पर यज्ञ का आयोजन किया गया।
शहर के बड़े शिव मंदिरों में विशेष शृंगार किया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से भक्तों को दर्शन करवाए गए। इस बार सागर, शिवबाड़ी, हर्षोल्लाव, संशोलाव, मार्कडेंश्वर, गोपेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध मंदिरों के आगे लगने वाले मेले नहीं लगे।
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