प्रदेश के बड़े नेताओं के यू-टर्न और समझौते से भले ही कांग्रेस पर आया सियासी संकट फिलहाल टल गया है। लेकिन, भरतपुर जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधना अशोक गहलोत सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। क्योंकि इस राजनीतिक उठापटक में भले ही डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह अपना कैबिनेट मंत्री पद गंवा चुके हैं। लेकिन, जिले में उनका प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए जिले के ज्यादातर कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी निष्ठा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
क्योंकि हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आह्वान पर हुए शक्ति प्रदर्शन में कई ऐसे नेता भी शरीक हुए, जिन्हें पायलट गुट में समझा जाता था।
इसका दोनों गुटों के बड़े नेताओं ने नोटिस लेते हुए अपनी डायरियों में हिसाब-किताब लिख लिया है। इधर, बदले माहौल पर ब्यूरोक्रेसी भी अब गंभीरता से नजर रखे हुए है। माना जा रहा है कि जल्द होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों, संगठनात्मक और प्रशासनिक फेरबदल में स्पष्ट होगा कि समझौते का फार्मूला क्या रहा।
जिले में कौन पावरफुल हुआ और कौन कमजोर। इधऱ, मौजूदा जिलाध्यक्ष शेरसिंह सूपा अपने पद पर बने रहेंगे अथवा नई नियुक्ति होगी। इसे लेकर भी काफी उत्सुकता है।अगर पायलट गुट हावी हुआ तो सूपा की जिलाध्यक्ष पद पर पुनः ताजपोशी हो सकती है। क्योंकि उन्हें पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का निकट समझा जाता है। अन्यथा निहालसिंह, दिनेश सूपा, आदित्य राज, जलीस खान, मुरारी गुर्जर, मनोज शर्मा आदि के नाम पर विचार हो सकता है।
राजनीतिक नियुक्तियां
जिले में यूं तो राजनीतिक कई नियुक्तियां हो चुकी हैं। लेकिन नगर विकास न्यास और बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति समेत कई संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियां होनी बाकी हैं। सबसे अधिक जोर यूआईटी अध्यक्ष पद पर होगा। चूंकि हाल के माहौल में कई लोगों ने पार्टी के साथ निष्ठा दिखाई थी। इसलिए पायलट खेमे से उनकी सिफारिश होना मुश्किल है। यूआईटी अध्यक्ष पद के लिए दर्जन भर से अधिक नाम चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि अगर पायलट गुट की चली तो अप्रत्याशित नाम सामने आ सकता है।
प्रशासनिक फेरबदल
हालांकि अफसरों के तबादले हाल ही होकर चुके हैं। इसलिए प्रशासनिक फेरबदल की ज्यादा संभावना नहीं है। लेकिन सियासी माहौल के अनुसार निष्ठा बदल चुके दो आला अफसर पायलट गुट के हावी होने पर बदले जा सकते हैं। माना जा रहा है कि पायलट गुट की कोशिश रहेगी कि एसडीएम, डीवाईएसपी से लेकर कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर उनकी पसंद के अफसर ही लगाए जाएं।
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