अस्थायी डॉक्टर्स को सेवा से हटाने पर लगाई रोक, प्रमुख चिकित्सा सचिव और निदेशक सहित सीएमएचओ सीकर से जवाब मांग

हाईकोर्ट ने प्रदेशभर मेंं काम कर रहे प्रार्थी अस्थाई डॉक्टर्स को सेवा से हटाने वाले 23 जुलाई 2020 के आदेश की क्रियांविति पर रोक लगाते हुए उन्हें सेवा में लगातार काम करते रहने का निर्देश दिया है। वहीं मामले में प्रमुख चिकित्सा सचिव व निदेशक सहित सीएमएचओ सीकर सहित अन्य अफसरों से 26 अगस्त तक जवाब देने के लिए कहा है। अदालत ने यह अंतरिम निर्देश डॉ. मोनिका चौधरी व अन्य की याचिका पर दिया।

अधिवक्ता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश में डॉक्टर्स की कमी को दूर करने के लिए प्रार्थी डाॅक्टर्स की नियुक्ति एक कमेटी के जरिए अस्थाई तौर पर हुई थी। लेकिन 9 जुलाई को चिकित्सा निदेशक ने इन्हें हटाने का निर्देश दिया। साथ ही सीएमएचओ को कहा कि वे अस्थाई डॉक्टर्स की सेवा आगे नहीं बढ़ाएं या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय सीएमएचओ ने प्रार्थियों को सेवा से हटाने का आदेश जारी किया।

पात्र दिव्यांग को उचित मूल्य की दुकान का आवंटन क्यों नहीं किया
वहीं हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में दौसा के पांचौली में पात्र होने के बावजूद दिव्यांग को उचित मूल्य की दुकान आवंटित नहीं करने पर खाद्य सचिव, दौसा कलेक्टर और डीएसओ सहित अन्य से जवाब मांगा है।

पीएचसी में कार्यरत कर्मचारियों को हटाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई

हाईकोर्ट ने पीपीपी मोड पर चल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगे एएनएम, जीएनएम, प्रयोगशाला सहायक और कम्प्यूटर ऑपरेटर्स सहित सफाई कर्मचारियों को हटाने पर रोक लगा दी है। जस्टिस एके गौड़ ने यह अंतरिम निर्देश विनीत कुमार मिश्रा व अन्य की याचिकाओं पर दिया।

अधिवक्ता आरपी सैनी ने बताया कि प्रार्थी कई सालों से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्लेसमेंट एजेन्सी के जरिए काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ कोई भी शिकायत नहीं थी और कोविड: 19 के संक्रमण के दौरान भी उन्होंने अच्छा काम किया था। लेकिन फिर भी चिकित्सा विभाग उन्हें नियुक्त करने वाली एजेंसी का काम सही नहीं बताकर हटा रहा है। ऐसे में प्लेसमेंट एजेन्सी की गलती का खामियाजा प्रार्थी नही भुगत सकते और उन्हें पद से हटाना गलत है। इसलिए उन्हें पद से हटाने पर रोक लगाई जाए।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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