लक्ष्मी के दाे माेबाइल में मिलीं सैकड़ाें काॅल रिकाॅर्डिंग्स, पुलिस सुराग निकालने में जुटी

देचू के लोड़ता हरिदासोता में पाक विस्थापित परिवार के 11 सदस्यों की मौत की अब तक की जांच में सामूहिक आत्महत्या का माना जा रहा है। इन मौतों के घटनाक्रम, ऐसा भयावह कदम उठाने के कारणों की तह तक जाकर पुलिस अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। इस परिवार के एकमात्र जिंदा बचे सदस्य केवलराम भील को नींद की गोली देने की बात सुसाइड नोट में सामने आई थी। लेकिन उस दिन जांच के लिए गए ब्लड की रिपोर्ट भी अब तक नहीं मिल पाई है।

इसी तरह पुलिस को सुसाइड नोट की परिवार के कुछ सदस्यों से हैंड राइटिंग का मिलान कराने, इन सभी के शव में कौनसा जहर था, विसरा की विस्तृत जांच रिपोर्ट, घटना से एक दिन पहले लक्ष्मी द्वारा बनाए तकरीबन दो घंटे के वीडियो की जांच इत्यादि से जुड़ी रिपोर्ट्स एफएसएल से मिलनी है।


पुलिस अधीक्षक (जोधपुर ग्रामीण) राहुल बारहठ ने बताया कि एफएसएल रिपोर्ट्स के मिलने से काफी कुछ स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटनाक्रम में कब, क्या और कैसे हुआ था। जैसे मौके पर मिला सुसाइड नोट किसने लिखा था, उसके लिए हैंड राइटिंग का मिलान होने पर ही पता चल सकेगा।

इसी तरह, सुसाइड नोट में लिखा था कि केवलराम को नींद की गोलियां दी गई थी, इसकी पुष्टि के लिए उसके खून की जांच से जुड़ी रिपोर्ट मिलने से ही हो सकेगी। वीडियो में कोई कांट-छांट है या नहीं, उसकी जांच से ही पता चलेगा। विसरा रिपोर्ट मिलने से घटनाक्रम से जुड़े टाइमिंग कि रात को कब-क्या हुआ होगा, इसके बारे में कुछ उपयोगी जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पुलिस अधीक्षक बारहठ के अनुसार इस प्रकरण में लक्ष्मी द्वारा हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी शिकायत दर्ज करवाने की बात आई थी। इस पर पोर्टल से भी लक्ष्मी द्वारा किए गए सभी कॉल की रिकॉर्डिंग भी मंगवाने के लिए ईमेल कर चुके हैं।

हर किसी से आशंकित रहने के पीछे मनोस्थिति या कुछ और?
पुलिस सूत्रों के अनुसार लक्ष्मी का एक मोबाइल ऐसा था, जाे कि ऑटो-कॉल रिकॉर्डिंग मोड पर रहता था। यानि हर किसी से होने वाली बात रिकॉर्ड करती थी। इनमें से अधिकांश कॉल रिकॉर्डिंग ऐसी बताई जा रही हैं, जिनसे लगता है कि लक्ष्मी हर किसी से आशंकित रहती थी।

ऐसा करने की वजह उसके मन का भय या कुछ कारण था या उसकी मनोस्थिति ऐसी हो गई थी? इसकी पुष्टि करने के लिए पुलिस विशेषज्ञों की मदद से साइकोलॉजिकल अटॉप्सी की संभावनाएं भी तलाश रही है और इसके लिए वीडियो और ये कॉल रिकॉर्डिंग भी काम में आ सकती हैं।


एक साल के सारे काॅल रिकाॅर्ड हैं
घटनास्थल पर पुलिस को एक साधारण मोबाइल मिला था, जो लक्ष्मी का था। जबकि दूसरा मोबाइल घटना के दो दिन बाद पुलिस को मिला। उसमें करीब दो घंटे के वीडियो थे। इन दोनों में से पहले मिले मोबाइल में तो तकरीबन एक साल की मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस की एक टीम को तो इन सैंकड़ों कॉल की रिकॉर्डिंग सुनने के लिए लगाया गया है। ताकि केस से संबंधित जो भी कॉल रिकॉर्डिंग हों, उनकी ट्रांस्क्रिप्ट तैयार की जा सके।

इनमें यदि कोई ऐसा व्यक्ति भी है, जो अब तक पुलिस की नजर में नहीं आया हो, तो उससे भी पूछताछ की जा सके। सूत्रों के अनुसार जिस मोबाइल से वीडियो बनाए गए थे, उनमें भी कुछ कॉल की रिकॉर्डिंग थी, लेकिन वो इस केस से कितनी जुड़ी है, उसकी जांच की जा रही है।



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