(ओमप्रकाश शर्मा) हाईकाेर्ट की दखल के बाद भले ही सरकार ने ग्रेटर नगर निगम व हैरिटेज नगर में दाे सीईओ लगा दिए है। लेकिन दाे माह से लाॅक डाउन खुलने के बाद भी दाेनाें निगम के कामकाज का बंटवारा अफसर कागजाें में ही करके खानापूर्ति कर रहे है। अभी तक अफसराें ने मुख्यालय व जाेन स्तर फाइलाें की स्क्रुटनी ही नहीं की है। हैरिटेज नगर निगम के मुख्यालय (पुराना पीएचक्यू) में एक भी अफसर के लिए बैठने के लिए ऑफिस तैयार नहीं किया गया है।
जबकि दाे माह पहले जाेन स्तर पर एक कराेड़ रुपए और निगम मुख्यालय स्तर पर ढ़ाई कराेड़ रुपए का सिविल कार्याे के लिए टैंडर हाे चुके है। खास बात यह है कि सरकार ने हैरिटेज निगम व ग्रेटर निगम ने एक आदेश जारी करके उपायुक्त लगा दिए थे। इन अफसराें काे अलग-अलग काम शुरू करना था। लेकिन निगम के सीईओ दिनेश यादव ने एक आदेश जारी करके सभी अधिकारियाें काे आगामी आदेशाें तक माैजूदा पदाे पर ही काम करने के आदेश जारी कर दिए है। दाेनाें निगम के ज्यादातर मामलाें में ग्रेटर सीईओ की दखल रहती है।
अभी सिविल कार्यों के लिए ही टेंडर
निगम के विभाजन के बाद ग्रेटर में जगतपुरा जाेन, आदर्शनगर, मालवीयनगर, मुरलीपुरा और झाेटवाड़ा जाेन नए बने है। हैरिटेज निगम में किशनपाेल जाेन बनाया गया है। चार माह पहले नए जाेन बनाने के लिए गजट नाेटिफिकेशन जारी हाे गया था। लेकिन अभी तक नए जाेन में कार्यालय ही नहीं बने है। हाल ही में निगम मुख्यालय ने अभी तक महज नए जाेन कार्यालयाें के सिविल कार्याें के लिए टेंडर जारी किए है।
^दाेनाें निगम के कामकाज का विभाजन चल रहा है। सरकार ने डीसी लगा दिए थे, लेकिन नीचे वाले कर्मचारी-अफसराें का विभाजन हुआ नहीं हुआ ताे पहले वाले पद पर फिलहाल काम करने के लिए आदेश निकाले थे। दाे-चार दिन में विभाजन कर देंगे। - दिनेश यादव, सीईओ, ग्रेटर नगर निगम जयपुर
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ