सियासी संकट से पीछा छूटा फोन टैपिंग का मुद्दा अब भी सरकार के लिए मुसीबत, विपक्ष विधानसभा में करेगा हंगामा

सचिन पायलट की वापसी के साथ ही गहलोत सरकार पर आया सियासी संकट तो फिलहाल टल गया लेकिन इस दौरान फोन टैपिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद विधानसभा में भी गूंजेगा। हालांकि गहलोत बहुमत परीक्षण के दौरान बयान दे चुके हैं कि सरकार ने किसी विधायक का फोन टेप नहीं करवाया है। लेकिन विपक्ष अपने हाथ आए इस मुद्दे को खाली नहीं जाने देना चाहता। मौजूदा सत्र के लिए गृह विभाग से जो सवाल पूछे गए हैं उनमें फोन टैपिंग भी शामिल है।
भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने सरकार से सवाल पूछा है कि पिछले दिनों फोन टैपिंग के कितने मामले सामने आए हैं और किस कानून और आदेश के तहत की गई है। काबिले गौर है कि जब सरकार सियासी संकट का सामना कर रही थी तो फोन टैपिंग के तीन ऑडियो वायरल किए थे। गहलोत कैंप की ओर से यह दावा किया गया कि इन ऑडियो में भंवरलाल शर्मा, गजेंद्र सिंह शेखावत और विश्वेंद्र सिंह की आवाज थी। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और सरकार पर विधायकों की फोन टैपिंग का आरोप लगाया।

हालांकि सरकार इसका खंडन करती रही। इसके कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर एक और सूची वायरल हुई जिसमें भाजपा ने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार बाड़ाबंदी में भी अपने विधायकों के फोन सर्विलांस पर रख रही है। गहलोत ने इन आरोपाें को भी सिरे से नकार दिया।

हालांकि फोन टैपिंग के मामले में सरकार पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी अपना जवाब भेज चुकी है और केंद्र सरकार की तरफ से अब तक सरकार के जवाब को लेकर कोई आपत्ति भी नहीं आई है। ऐसे में भले ही भाजपा विधानसभा में इस मुद्दे को उछालकर सियासी माहौल को गरमा लेगी लेकिन उसके हाथ कुछ खास नहीं आना है। हालांकि भाजपा को अब भी उम्मीद है कि इस मुद्दे को लेकर वह कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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