बेहतर बुनियादी सुविधाओं से एनसीआर का रेजिडेंशियल हब बना अलवर

राजस्थान का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र माना जाने वाला अलवर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का रेजिडेंशियल हब बन गया है। दरअसल, दिल्ली के नजदीक होने और बेहतर कनेक्टिविटी से अलवर घर खरीदने के लिए बेहतर डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा है। दिल्ली, गुड़गांव और जयपुर से जुड़े होने तथा बुनियादी सुविधाएं बेहतर होने से अलवर में घर खरीदने में दिलचस्पी बढ़ी है।

बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने से अलवर व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ऑटोमोबाइल और एंसिलरी इकाइयां है। लाखों श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है, जो कार्य में जुटे हुए है। दूसरे शहरो और प्रदेशों से आने वाले लोग अलवर में रहना पसंद करते हैं। इसका बड़ा कारण जयपुर, गुडगांव और दिल्ली की तुलना में भिवाड़ी और अलवर में घर की कीमत 20 से 40 फीसदी कम और एनसीआर कल्चर के बावजूद लिविंग कॉस्ट कम होना है। वहीं, रियल स्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी में निवेश पर शानदार रिटर्न की संभावना है।

नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, कई इकाइयों का हो रहा है निर्माण
रीको के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक भिवाड़ी में कारोली और सलारपुर में दो नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इनमें करीब 85 लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों का निर्माण चल रहा है। इनमें करीब 4 हजार श्रमिकों की जरूरत होगी। पिछले दिनों व्यावसायिक भूखंडों की नीलामी में कारौली, खुशखेड़ा और चौपानकी में लगभग 30 करोड़ रुपए की कीमत के 27 औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए गए। भिवाड़ी में बढ़ते अवसरों के मद्देनजर लोग यहां निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं।

सरकार की ओर से छूट के बाद नए उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है। इस वजह से दो वर्ष पूर्व 6-7 हजार रुपए वर्ग मीटर में आवंटित होने वाले व्यावसायिक भूखंडों की कीमत 12 हजार रुपए वर्ग मीटर तक पहुंच गई है। नीमराना क्षेत्र स्थित जापानी जोन और घिलोठ औद्योगिक क्षेत्र उद्योगपतियों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र है। इससे मकानों की मांग बढ़ेगी। देशी-विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत में विस्तार के अवसर देख रही है। इसका फायदा भी अलवर को मिलेगा और यहां निवेश बढ़ेगा।

रैपिड रेल और कार्गो एयरपोर्ट लाएंगे बड़े बदलाव
दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक की समस्या से निपटने और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए लाया जाने वाला रेपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम अलवर के विकास में अहम हो सकता है। रेपिड रेल का काम शुरू हो चुका है। इससे दिल्ली-अलवर के बीच यात्रा का समय कम होगा।

अभी अलवर से दिल्ली जाने में तीन घंटे का समय लगता है, जो घटकर डेढ़ घंटा रह जाएगा। इससे चलते दिल्ली-गुडगांव में नौकरी करने वाले आसानी से अप-डाउन कर सकेंगे। अलवर के कोटकासिम में प्रस्तावित कार्गो एयरपोर्ट के लिए नागरिक विमानन मंत्रालय ने राज्य सरकार को जमीन उपलब्ध करने को कहा है। भिवाड़ी के मध्य से गुजरने वाले दिल्ली फ्रेट कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। इसके बनने के बाद इंडस्ट्रियल क्षेत्र से सामान लाने व भेजने में समय की बचत होगी।



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