रायसिंहनगर एएसपी रहा अमृतलाल अपने 10 माह के कार्यकाल में 6 माह से पुलिस मुख्यालय के राडार पर था। उसकी रुपए लेकर काम करने की हरकताें की पीड़ित लाेगाें ने गुमनाम चिट्ठियां लिखकर उच्चाधिकारियाें काे अवगत करवाया था। इन चिट्ठियाें में अमृतलाल जीनगर की भारी भरकम शिकायतें की गई थीं।
तत्कालीन एसपी और आईजी बीकानेर कार्यालय काे पहुंची इन चिट्ठियाें पर परिवादियाें और पीड़िताें के नाम नहीं थे। इसलिए इन शिकायताें काे पुलिस मुख्यालय भिजवाकर अवगत करवाया गया था। मामला विजिलेंस से जुड़ा था, इसलिए इस संबंध में पत्राचार भी गाेपनीय रहा था। इन चिट्ठियाें के पुलिस मुख्यालय पहुंचने के बाद एसीबी डीजीपी काे भेज दी गईं।
क्याेंकि मामला एक सीनियर आरपीएस का था, इसलिए एसीबी अपने स्तर पर एएसपी की निगरानी कर रही थी, लेकिन चालाक एएसपी अमृतलाल दलाल अनिल बिश्नाेई के मार्फत ही साैदे तय करता था और लेनदेन भी दलाल अनिल बिश्नाेई ही करता था। एसीबी एडीजी दिनेश एमएन ने बताया कि आराेपी एएसपी अमृतलाल जीनगर के खिलाफ लिखी गई गाेपनीय चिट्ठियाें काे शिकायत की तरह ही लिया गया था।
लेकिन परिवादियाें के नाम नहीं हाेने के कारण ये चिट्ठियां केवल शिकायतें ही बनकर रह गईं। हालांकि इससे एसीबी काे काम करने का माैका मिला। हमारे पास जैसे ही पीड़ित पहुंचा ताे हमने तुरंत सत्यापन और ट्रेप के लिए विशेष टीम गठित कर रायसिंहनगर भेज दी।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ