डेढ़ माह पहले संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से टिड्डी और उसके अंडे देने की सूचना भारत-पाकिस्तान समेत एशिया के सभी देशों को दी गई थी। लेकिन कोई भी देश पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाया और उसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। भारत और पाकिस्तान बॉर्डर पर टिड्डी भारी तादाद में अंडे देकर मर गई लेकिन अब उनके बच्चे वापस फसलों को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार हो रहे हैं।
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, नागौर, चूरू, झुंझुनू समेत कई जिलों में टिड्डी के बच्चे भारी तादाद में उथल-पुथल मचा रहे हैं। पहले पीले रंग की टिड्डी आई। जिसने फसलों को पांच से 10% ही नुकसान पहुंचा पाया क्योंकि पीले रंग की टिड्डी खाने के बजाए अंडे देने की फिराक में रहती है। कृषि और टिड्डी नियंत्रण विभाग ने इस को मारने में जी जान लगा दी। केंद्र सरकार ने पश्चिमी राजस्थान के ज्यादातर जिलों को ड्रोन उपलब्ध कराएं और एक हेलीकॉप्टर भी भेजा ताकि टिड्डी अंडे न दे पाए लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
बाड़मेर : पचपदरा तहसील के खजूरों की ढाणी और चौहटन तहसील के केलमोर गांव में पाकिस्तान से फाके उड़कर आने लगे हैं। अभी तक यहां सीमा पार से टिड्डी ही आती थी लेकिन अब फाके भी आने लगे हैं।
चूरू : राजगढ़ तहसील के लूणी झाबर, पहाड़सर, सुरतपुरा और ढाबर, ऊंटवालिया और बिनासर में फाके उत्पात मचा रहे हैं।
बीकानेर : नोखा तहसील में मोरखा,कुचोर अगुणी, लालमदेसर छोटा, बादनू, बिग्गा बड़ाबास, केऊ, उपनी, रिडी, बाना, बीकानेर तहसील के बेलासर,नापासर, देशनोक की रोही, तेजरासर और किलचू,खाजूवाला तहसील के 7 पी एच एम मैं फाके बड़ी संख्या में आ गए हैं।
झुंझुनू : पाटूसर में टिड्डी के बच्चे भारी संख्या में पहुंचे।
नागौर : डेगाना तहसील के संजू,जालसू खुर्द और जायल तहसील के बेरासर ग्राम पंचायत में भारी तादाद में टिड्डी के बच्चे फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
- कृषि विभाग रोज फाके की स्थिति की समीक्षा करता है। प्रत्येक जिले से डाटा एकत्र हो रहे हैं। उसी अनुसार साधन सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं। हम अपनी तरफ से जी जान से जुटे हैं ताकि किसानों का नुकसान ना हो किसान भी सतर्क रहें। - रामकिशोर मेहरा, सहायक निदेशक,कृषि विभाग
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