लंबे समय बाद भारत फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य बना है। इस मिशन के लिए सुरक्षा परिषद में सामान्य मुद्दों पर भारत की बात रखने, वक्तव्य देने व प्रतिनिधित्व करने के लिए केंद्र सरकार ने जोधपुर के राजेश परिहार को नियुक्त किया है।
भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी परिहार अक्टूबर में न्यूयार्क में जॉइन में करेंगे और जनवरी 2021 से भारत की बतौर सदस्य की अवधि शुरू होगी। वे अभी भारत के चीन में राजदूतावास में प्रथम सचिव (आर्थिक-वाणिज्यिक मामलों के प्रमुख) पद पर कार्यरत है।
इधर, इसी गांव के आईआरएस पारस सांखला (बिंजवाड़िया) की बीजिंग दूतावास के प्रथम सचिव पद पर नियुक्ति हुई है। गौरतलब है कि मथानिया की लाल मिर्च प्रसिद्ध है तो अब यहां के एक लाल ने इस गांव की ख्याति बढ़ा दी है। गांव के किसान परिवार से निकले राजेश परिहार को 11 साल की सेवा में वह मौका मिला है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत से मथानिया के राजेश परिहार की नियुक्ति
जहां पहुंचने के लिए दुनिया के देश पूरी मशक्कत करते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को करीब 10 साल बाद अस्थायी सदस्यता मिली है। खास इसके लिए परिहार की नियुक्ति मिशन में की गई है। परिहार ने दैनिक भास्कर को बताया कि पाकिस्तान व चीन से रिश्तों के चलते भारत का सुरक्षा परिषद में पहुंचना कई मायनों में महत्वपूर्ण है और इसी मिशन में उन्हें जिम्मेदारी मिलना उनके जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
परिहार ने बताया कि वे गांव में ही पले-पढ़े हैं और उच्च शिक्षा के लिए जोधपुर आ गए थे। वर्ष 2001 में ग्रेजुएशन करने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गए और 2009 में चयन हुआ। सुरक्षा परिषद में नियमित मुद्दों पर वे ही भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी भी शुरू कर दी है। खासकर, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की रणनीति और अब तक हुई बातों को उन्होंने रिकॉल करना शुरू कर दिया है।
दरअसल, दो साल की यह सदस्यता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें भारत अपने वैश्विक महत्व के मुद्दे विश्व के सबसे शक्तिशाली परिषद की माध्यम से दुनिया के समक्ष रख पाएगा। भारत ने इसी साल जून में रिकॉर्ड 192 में से 184 मतों से यह सदस्यता हासिल की थी। इससे पहले भारत 2011-12 में भी सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।
पारस का परिवार आज भी करता है खेती
इसी गांव के आईआरएस पारस सांखला (बिंजवाड़िया) की बीजिंग दूतावास के प्रथम सचिव पद पर नियुक्ति हुई है। प्रथम नियुक्ति 2008 में होने के बाद वे कांडला व अहमदाबाद में 2014 तक असिस्टेंट कमिश्नर रहे। फिर तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली के ओएसडी रहे। वर्तमान में डीआरआई कस्टम के पद पर दिल्ली में कार्यरत हैं। इन दोनों ही अधिकारियों के परिवार आज भी खेती का कार्य ही करते हैं। पारस सांखला के बड़े भाई हीरालाल सांखला ने बताया कि पारस ने विपरीत परिस्थितियों में रहने के बावजूद परिवार व गांव का नाम रोशन किया है।
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