दशलक्षण पर्व के चाैथे दिन बुधवार को जैन धर्म के 9वें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत का निर्वाण कल्याणक भी मनाया गया। इस अवसर पर श्रावकों ने अपने घर पर ही नैवेद्य सजाकर भगवान का समर्पित किया। जिनवाणी के अनुसार दशलक्षण का चतुर्थ दिवस उत्तम सत्य धर्म माना गया है, कहीं उत्तम शौच को चौथा पर्व माना जाता है।
श्रावकों ने अपने गुरुओं की आज्ञा अनुसार धर्म की पूजा की। पर्युषण के वर्चुअल कार्यक्रम में गणिनी ज्ञानमती माता ने उत्तम सत्य धर्म की विवेचना करते हुए कहा कि जो सत्य धर्म का पालन करता है, उसका संसार परिभ्रमण शीघ्र ही समाप्त हो जाता है, क्योंकि एक झूठ को सत्य सिद्ध करने के लिए व्यक्ति सौ झूठ भी बोल जाता है।
जितना मिला है उसी में खुश रहना ही उत्तम शौच धर्म है
आदिनाथ दिगंबर जैन (लाल) मंदिर में उत्तम शौच के चौथे दिन सोशल डिस्टेंस के साथ शांति धारा की गई। इसके पुण्यार्जक रूपचंद शाह एवं विमल चंद जैन आदिनाथ ने की। मीडिया प्रभारी योगेश जैन बताया कि शांति धारा के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर अध्यक्ष लोकेश जैन ने बताया कि उत्तम शौच हमें यही सिखाता है कि शुद्ध मन से जितना मिला है, उसी में खुश रहो। परमात्मा का हमेशा शुक्रिया मानो और अपनी आत्मा को शुद्ध बनाकर ही परम आनंद मोक्ष को प्राप्त करना मुमकिन है।
जिनालयों में अभिषेक कर कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना की
दिगंबर जैन समाज के चल रहे दशलक्षण धर्म पर्व के चौथे दिन को उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विमल जैन ने बताया कि प्रतिदिन की तरफ सुबह अभिषेक बेला में पुजारी द्वारा समस्त जिनालयों में अभिषेक क्रिया कर शीघ्र कोरोना वायरस से मुक्ति की प्रार्थना की। उसके बाद जिनालय के पट्ट बन्द कर दिए गए। लाेगाें ने अपने घरों पर ही अष्टद्रव्यों से देव शास्त्र गुरु, पंचमेरी, उत्तम शौच, दशलक्षण धर्म आदि की पूजन की। शास्त्रों के अनुसार लोभ को पाप का बाप बताया गया है। लोभ के वशीभूत होकर व्यक्ति के अन्दर कोध्र, मायाचारी, अहंकार एवं छल कपट होना स्वभाविक है।
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