विश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन मांगते ताे 75 नहीं 71 वाेट ही पड़ते

बीजेपी में फूट व गुटबाजी इस आलम पर है कि विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर बीजेपी डिवीजन मांगती ताे बीजेपी के 75 की जगह 71 ही वाेट पड़ते। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी के चार विधायक सदन में पहुंचे थे लेकिन एक-दाे घंटे बाद सदन छाेड़कर चल गए थे। इनमें से कुछ ने अपना फाेन तक ऑफ कर लिया था, उधर उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठाैड़ ने इनसे संपर्क साधने में जुटे हुए दिखे लेकिन इनसे काेई संपर्क नहीं हाे सका। माना जा रहा है कि इसी वजह से बीजेपी ने विश्वास प्रस्ताव पर डिवीजन नहीं मांगा।

क्या है इसे यूं समझे
दरअसल बीजेपी नेताओं में गुटबाजी है और अलग - अलग खेमे बने हुए। ऐसे में एक गुट ने दूसरे काे कमजोर दिखाने के लिए ऐसा किया। प्रदेश में ऑपरेशन लाेटस फेल हाेेने के बाद प्रदेश में इसकी कमान संभालने वाले नेताओं काे दूसरा गुट उनकी कमजोरी दिखाना चाहता है। गौरतलब है कि पिछले दिनाें सियासी संकट के दाैरान 30 विधायकों काे गुजरात भेजा जाना था लेकिन 11 विधायकों ने जाने से इंकार कर दिया था। सिर्फ 18 ही बाहर जा सकें थे। एक व्यवस्था में जुटा था।

आदिवासी बेल्ट के ये चार विधायक
गोपीचंद मीणा आसपुर, गौतम मीणा धारियाबाद, हरेंद्र निनामा घाटाेल व गढ़ी से कैलाश मीणा के नाम शामिल हैं।

^डिवीजन नहीं मांगा जाएगा इस पर पहले ही फैसला हाे गया था। ये विधायक बाहर गए थे ताे इनके लिए पूछा भी था और वापस बुलाने के लिए संदेश भी जारी किया था। इसके बाद इनसे संपर्क नहीं किया । -राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष
^दाे दिन से तबियत ठीक नहीं लग रही थी। उल्टी दस्त की प्रॉब्लम हुई थी। दवा लेकर घर पर ही आकर साे गया था। बाकी तीन विधायकाें काे मुझे नहीं पता। -गाेपीचंद मीणा, आसपुर विधायक



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