तत्कालीन पीएम शास्त्री के तुला दान को जुटाया 56.86 किग्रा साेना चित्तौड़ सीजीएसटी काे सौंपें

55 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए जुटाए 56.863 किलो सोना लेने के लिए छोटीसादड़ी के वादी की अर्जी काेर्ट ने खारिज कर दी है। यह सोना चित्तौड़ जिला प्रशासन के पास है। कोर्ट ने यह स्वर्ण सीजीएसटी चित्तौड़गढ़ डिविजन को सौंपने के आदेश दिए हैं।
प्रार्थना पत्र के अनुसार साेने से तौलने का एलान करने वाले छाेटी सादड़ी के गाेमाना निवासी गणपतलाल आंजना के बेटे गाेवर्धन ने इसी साल 23 जुलाई काे साेना सुपुर्द करने का प्रार्थना पत्र उदयपुर सीजेएम काेर्ट में पेश किया था। अधिवक्ता प्रवीण खंडेलवाल के जरिये सीजीएसटी चित्ताैड़गढ़ के अधिकारी ने भी प्रार्थना पत्र पेश करगया कि काेर्ट के पूर्व आदेश अनुसार साेना सीजीएसटी काे सौंपने के आदेश हाे चुके हैं। सुनवाई कर काेर्ट ने सीजेएम के पूर्व आदेश को बहाल रखा है।

पूरी कहानी : तुलादान से पहले हो गया था शास्त्री का निधन, तब चित्तौड़ प्रशासन के पास है सोना
प्रकरण के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 16 दिसम्बर 1965 में चित्तौड़ के छोटीसादड़ी में यात्रा प्रस्तावित थी। गणपतलाल आंजना ने शास्त्री काे साेने से ताैलने के 56.863 ग्राम साेना इकट्ठा किया। शास्त्री की यात्रा से पहले यह साेना चित्ताैड़ के तत्कालीन जिला कलेक्टर के पास सुरक्षा की दृष्टि से जमा कराया गया था। इधर, ताशकंद समझौते के दौरान शास्त्री का निधन हो गया।

गणपतलाल आंजना ने 26 फरवरी, 1966 काे चित्तौड़गढ़ कलेक्टर काे प्रार्थना पत्र पेश कर सोना सुपुर्द करने की कहा। इसी बीच गोमाना के ही गुणवंत ने गणपतलाल व अन्य के खिलाफ साेने काे लेकर धाेखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करा दी, जिससे साेना जब्त हाे गया। मामला उदयपुर काेर्ट में आया। निचली अदालत से 11 जनवरी, 1975 काे गणपत व अन्य काे सजा सुनाई और साेना स्वर्ण नियंत्रक अधिकारी काे देने के आदेश हुए। सजा हाेने पर गणपत ने डीजे काेर्ट में अपील की ताे 7 अगस्त, 1978 काे बरी किया गया। इसके बाद काेई अपील नहीं हुई।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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