कवि गोपालदास नीरज की कविता कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे...। टिड्डी और उनके अंडों से निकले फाको पर यह इन दिनों मौजूं है। पीली टिड्डियां आईं और जिले के तमाम इलाकों में अंडे दे गई। कृषि विभाग ने पीली टिड्डियों को ड्रोन से लेकर हेलिकॉप्टर तक से मारा। नियंत्रण के दावे रोज होते रहे। लेकिन, 15 दिन बाद अंडों से निकले फाके अब कृषि विभाग और किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं।
किसानों ने टिड्डी से तो राहत पा ली, लेकिन फाके अब परेशान कर रहे हैं। शुक्रवार को कृषि विभाग ने लूणकरणसर, श्रीडूंगरगढ़ और बीकानेर तहसील के 510 हैक्टेयर में फाके मारे। फिर भी अभी नियंत्रण आसानी से नहीं हो पा रहा, क्योंकि विभाग को यह जानकारी नहीं है कि टिड्डी ने कहां-कहां अंडे दिए।
जहां बच्चे बाहर आ रहे हैं, उसकी सूचना विभाग को मिल रही है और उन पर छिड़काव किया जा रहा है। सहायक निदेशक रामकिशोर मेहरा का कहना है कि अंडे कितनी तादाद में दिए गए इसकी सटीक जानकारी नहीं है। अब उनके बच्चों से अंदाजा हो रहा है।
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