गंगाशहर के चांदमल बाग में जलभराव के समाधान के लिए आरयूआईडीपी ने 10 करोड़ रुपए स्वीकृत किये थे। इसमें 5 करोड़ रुपए मई में मिल भी गए, लेकिन यूआईटी से अब तक प्रोजेक्ट की डीपीआर ही नहीं बनी।
गंगाशहर चांदमल बाग की सैकड़ों बीघा भूमि पर इकट्ठे पानी का मुद्दा भास्कर ने उठाया था।
उसके बाद तत्कालीन कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने क्षेत्र के लोगों से इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों से प्रोजेक्ट बनवाने की बात कही थी। यूआईटी सचिव मेघराज मीणा और एक्सईएन भंवरू खां भी मौके पर ही थे। पहले यह काम आरयूआईडीपी से कराने की बात थी। लेकिन, आरयूआईडीपी का सीवरेज प्रोजेक्ट चलने के कारण उन्होंने असमर्थता जता दी।
बाद में काम यूआईटी को सौंप दिया गया। आरयूआईडीपी से इस काम के लिए 10 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। आरयूआईडीपी ने आधी रकम मई में ही यूआईटी को दे दी। लेकिन, प्रोजेक्ट शुरू होना तो दूर अभी तक डीपीआर ही नहीं बनी है। जबकि भारी बारिश की चेतावनी है।
भीनासर से आता है पानी
चांदमल बाग में सालों से एकत्रित हो रहा पानी गंगाशहर और भीनासर के घरों का है। बारिश में हालात और खराब हो जाते हैं। तालाब के आसपास रहने वालों को भारी बारिश के दौरान घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। चांदमल बाग के पानी को लिफ्ट करने के लिए एक नया पंपिंग स्टेशन प्रस्तावित है। पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन डाली जाएगी।
सीवरेज सिस्टम से घरों का पानी नहीं आएगा
गंगाशहर जोन में चल रहे सीवरेज कार्य का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि घरों का पानी चांदमल बाग में जमा नहीं होगा। यह पानी सीवरेज के माध्यम से एसटीपी में चला जाएगा। इससे चांदमल बाग में पानी का दबाव कम होगा। आरयूआईडीपी के इस प्रोजेक्ट में 300 किमी लंबी सीवरेज बिछाने का काम अंतिम चरण में है। चैंबरों का काम दिसंबर में पूरा हो जाएगा। उसके बाद घरों में कनेक्शन दिए जाएंगे।
- गंगाशहर में सीवरेज का काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। चांदमल बाग प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ रुपए आरयूआईडीपी देगी। 5 करोड़ दे चुके। बाकी बाद में देंगे। अतिरिक्त व्यय यूआईटी को वहन करना होगा। - डीके मित्तल, एक्सईएन, आरयूआईडीपी
- चांदमल बाग से पानी की निकासी के लिए कंसल्टेंट से डीपीआर बनवाई जाएगी। उसके टेंडर हो चुके हैं। एक फर्म से निगोसिएशन चल रहा है। - भंवरू खां, एक्सईएन, यूआईटी
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