शहर में चार दिन पहले हुई बारिश का असर अब भी नजर आ रहा है। कारण यह रहा, नाले साफ नहीं हुए और सीवर लाइनें क्षमता के अनुरूप नहीं रही और संसाधन नाकाफी साबित हुई। पानी की निकासी नालों व सीवर लाइन से पर्याप्त हो नहीं पाई। कंट्रोल रूम में 1400 शिकायतें आई, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते पूरी नहीं हो पाई। इसकी पूर्ति के लिए 55 मड पंप ही थे, जबकि आवश्यकता करीब 200 मड पंप व सबमर्सिबल पंप की थी। यही नहीं फायर ब्रिगेड में 54 गाड़ियां हैं, जिनमें डिजास्टर सिस्टम तक नहीं हैं।
यही वजह रही कि दो दिन बाद भी लोगों के घरों व बेसमेंट से पानी नहीं निकाला जा सका। निगम, जेडीए व जिला प्रशासन की तैयारी तो 24 घंटे में 100 एमएम बारिश की भी नहीं थी, जबकि 3 घंटे में बारिश हो गई 176 एमएम। परकोटे की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज जाम है, यहां स्मार्ट सिटी कंपनी का फोक्स सौंदर्यीकरण पर हैं, जबकि नये नाले व सीवर लाइन डालने पर ध्यान नहीं, इसलिए दुकानों में पानी भरा। यहां पूर्व में बनाए गए सीवरेज के मास्टर प्लान पर काम होना चाहिए।
पहले वीआईपी शिकायतों की सुध ली, फिर कच्ची बस्तियों में लगाए मड पंप...
पानी पूरे शहर में भरा, लेकिन सबसे पहले सुध ली गई सचिवालय, सीएमओ, राजभवन व अन्य वीआईपी लोगों के घरों की। इसके बाद अवैध रूप से बसी झालाना बस्तियां, अमानीशाह नाले से लगती बस्तियां व भट्टा बस्ती के नीचले इलाकों की, जहां टीलों से बहकर आई मिट्टी घरों व वाहनों पर आ जमी।
झालाना के तीन टीलों में तो अब भी दिन रात मड पंप चलाकर पानी निकाला जा रहा है। इसे लेकर विधायक रफीक खान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपदा प्रबंधन के अतिरिक्त इंतजाम करवाने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
1. तेज बारिश के कारण नाहरगढ़-जयगढ़ जाने वाले रास्ते में बीच में पहाड़ टूट कर सड़क पर गिरने के कारण रास्ता 4 दिन से बंद है, जिससे सैलानी यहां नहीं जाने के कारण मायूस होकर लौट रहे हैं।
2. दिल्ली रोड पर बारिश से मान बाग पहाड़ी की चट्टान टूटकर सड़क पर गिर गई थी। चार दिन बाद भी रास्ता नहीं खुल सका।
पापड़ के हनुमानजी मंदिर के अंदर तेज बहाव के कारण गोशाला और रसोईघर व पार्किंग का रास्ता बंद हो गया है। इससे बड़ी दुर्घटना का अंदेशा है। प्रशासन को सूचना दी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
चीनी की बुर्ज के पास मनेश्वर शिव मंदिर गणगौरी बाजार में भी तेज बारिश की वजह से पुराने परकोटे की दीवारे टूटकर मकानों पर गिर गई। इससे कई मकान छतिग्रस्त हो गए।
आगरा रोड पर पुरानी चूंगी के पास विजयपुरा में स्थित देवकी, रुकमणी, हनुमान, विकास, लक्ष्मण नगर, शुभम विहार, कैलाशपुरी व बसंत विहार सहित 20 से अधिक कॉलोनियां के रास्ते जलमग्न है। कई घरों में पानी जमा है।
शहर में शुक्रवार को हुई तेज बारिश के बाद जलमहल के आसपास की कॉलोनियों से बहकर आए तेज बहाव के पानी से पाल में कटाव हो गया। ऐहतियात के तौर पर प्रशासन ने आमेर से शहर की ओर आने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है।
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