33 दिन के सियासी क्वारेंटाइन से राज्य सरकार संक्रमण से मुक्त, भाजपा में बगावत के लक्षण

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को शुरू हुए विधानसभा सत्र में विश्वास मत हासिल कर लिया है। बीते 33 दिनों के सियासी संकट के बाद अब सरकार पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। सरकार को बहुमत के लिए 101 विधायकों का समर्थन चाहिए था लेकिन शुक्रवार को सदन में 123 कांग्रेसी विधायकों ने सरकार को अपना समर्थन दिया। इनमें पायलट कैंप के 19 व वे तीन निर्दलीय विधायक भी शामिल थे जो पिछले इसी सप्ताह की शुरुआत तक सरकार से बगावत कर दिल्ली में बैठे थे।

हालांकि अभी बसपा के 6 विधायकों के विलय पर हाईकोर्ट का फैसला आना बाकी है लेकिन अगर फैसला सरकार के खिलाफ भी आता है तो भी उसे कोई खतरा नहीं है। स्पीकर डॉ. सीपी जोशी को छोड़ दें तो सदन में अब कांग्रेस के पास अपने 105 विधायक हैं।

इनमें बसपा के 6 विधायक भी शामिल हैं। इनके अलावा 13 निर्दलीय, दो बीटीपी व 2 सीपीएम विधायक भी सरकार के समर्थन में ही हैं। नंबर गेम अब पूरी तरह से कांग्रेस सरकार के पक्ष में आ गया है। भाजपा और इसकी सहयोगी आरएलपी के पास मिलाकर 75 विधायक ही हैं। यही वजह है कि भाजपा सरकार के विश्वास मत के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला पाई।

विश्वास मत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सदन के बाहर बयान दिया कि भाजपा ने कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र ,गोवा, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश में जो षड्यंत्र रचे वही तरीके यहां भी अपनाए लेकिन, उसमें पूरी तरह एक्सपोज हो गए। उन्होंने कह कि यह कांग्रेस की नीतियों की, कार्यक्रमों की, सिद्धांतों की विजय है।

हमारे विधायक एक महीने से अधिक समय तक सारे त्यौहार छोड़कर एकजुट रहे ये उसकी विजय है।

असंभव फिर हुआ संभव
पिछले सप्ताह तक स्थितियां बिल्कुल उलट थीं। पायलट सहित 19 कांग्रेसी विधायक दिल्ली बैठे थे। इनके साथ 3 निर्दलीय विधायक भी थे। बसपा विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटकर रही थी। लेकिन गहलोत ने इस स्थिति से भी खुद को उबार कर बता दिया कि सियासत में उनके नाम के आगे जादूगर क्यों जोड़ा जाता है। भाजपा, गहलोत के कैंप में सेंधमारी नहीं कर पाई लेकिन विश्वास प्रस्ताव के दौरान उसके 4 विधायक गैर मौजूद जरूर थे। सियासी गलियाराें में कहा जा रहा है कि यह दांव भाजपा काे गहलाेत का मैसेज था।



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अशोक गहलोत (बाएं) और सचिन पायलट (दाएं)


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