डिस्कॉम ने रिपोर्ट में वोल्टेज 245 से 248 बताए, लेकिन इंजीनियरों ने एमसीबी में तार जलने को ठहराया जिम्मेदार

जिला अस्पताल की कोविड लैब में हाई वोल्टेज से फुंकी मशीनों को लेकर बिजली निगम पैनल बॉक्स में लगी एमसीबी के न्यूट्रल तार को जलने को असली कारण बता रहा है जबकि इंजीनियर लैब की बिजली सप्लाई में 245 से 248 वोल्टेज बता रहे हैं। डिस्काॅम इंजीनियरों का कहना है कि जिला अस्पताल और निजी लैब को भी इतने ही वोल्टेज सप्लाई हो रहे हैं, लेकिन वहां तो मशीनें आज तक फुंकी नहीं हैं। वहीं, एनएचएम इंजीनियर का कहना है कि डिस्कॉम अपनी लाइनों में बिजली सप्लाई तो सुधार नहीं रहा और दोष लैब की वायरिंग पर मंढ रहा है।

मशीनों और उपकरणों को चलाने के लिए जब 220 वोल्ट चाहिए, लेकिन डिस्कॉम के ट्रांसफार्मर से 250 से अधिक वाेल्ट बिजली सप्लाई हो रही है, जो मशीनों के लिए खतरनाक है। डिस्कॉम के एईएन और जेईएन ने बुधवार को एक्सईएन को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि कोविड लैब में फॉल्ट की सूचना पर जांच की गई तो डिस्ट्रिब्यूशन पैनल बॉक्स की एमसीबी में न्यूट्रल के तार का जलकर अलग होना पाया गया। न्यूट्रल का तार 2.5 एमएम का पाया गया, जिसकी वजह से सर्किट की आंतरिक वायरिंग में फॉल्ट हुआ। वहां बल्ब, ट्यूबलाइट, पंखे व अन्य उपकरण सही मिले।

दूसरे दिन न्यूट्रल टर्मिनल को सही करके 2.5 एमएम के स्थान पर 6 एमएम का तार लगा दिया गया। यह कनेक्शन एसएमडी फीडर पर है, जिस पर फेस से न्यूट्रल वोल्टेज 245 से 247 मापे गए। यहां वोल्टेज का फ्लक्चुएशन नहीं मिला और न ही 267 वोल्ट मिले। रानी मिल फीडर पर निजी लैब की मशीन फेस से न्यूट्रल वोल्टेज 245 से 248 पर सही चल रही है। वहीं जिला अस्पताल की मशीन भी 245 से 249 वोल्ट पर सही चल रही हैं, जबकि कोविड लैब का कनेक्शन तो जिला अस्पताल के बाद हुआ है।

एक्सईएन बीएल सैनी का कहना है कि लाइनों में बिजली बिलकुल सही सप्लाई हो रही है, जिससे दूसरे स्थानों पर कोई फॉल्ट नहीं हुए हैं। वहीं एनएचएम इंजीनियर का कहना है कि लाइनों में वोल्टेज ज्यादा से ही लैब की मशीनें फुंकी हैं। डिस्कॉम को पता है कि लाइनों में ज्यादा वोल्टेज सप्लाई हो रहे हैं, लेकिन वे अपनी गलती को नहीं सुधार रहे हैं।

^मेरी डिस्कॉम एक्सईएन से बात हुई है। उन्होंने बारिश के कारण लाइनों में वोल्टेज बढ़ने की बात कही और इसे 240 वोल्ट तक सुधार का भी आश्वासन दिया है। डिस्कॉम के ट्रांसफार्मर से ज्यादा वोल्ट सप्लाई हो रहे हैं। जबकि आमतौर पर लाइनों में 220 वोल्ट की सप्लाई होनी चाहिए। क्योंकि सभी उपकरण 220 वोल्ट पर संचालित होते हैं। लेकिन डिस्कॉम वोल्ट ज्यादा बता रहा है। फिर भी गलती मानने को तैयार नहीं है। इसलिए अस्पताल प्रशासन को मशीनों की लाइन में स्टेबलाइजर लगाने का सुझाव दिया है।
-ओपी विश्नोई, एईएन, एनएचएम, जयपुर



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