सांगानेर में ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधूरा, टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने 22 करोड़ रु. की मदद रोकी

सांगानेर में इंडस्ट्री के वेस्टेज को प्रदूषण रहित बनाने के लिए सीईपीटी बनने का काम 5 साल बाद भी अधूरा है। इसके पीछे एक बड़ी वजह मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल की ओर से आर्थिक मदद से हाथ खींचना है। संबंधित व्यापारियों के मुताबिक वहां से तकरीबन ₹22 करोड़ आना था, जो नहीं आ पाया। इससे कांट्रेक्टर ने काम रोक दिया। फिलहाल प्रोजेक्ट से 292 यूनिट ही जुड़ी हुई है। जबकि करीब 600 इंडस्ट्री का इससे जुड़ना बाकी है। इस जुड़ाव के लिए 6 किलोमीटर की लाइन का काम अधूरा है।
सांगानेर टैक्सटाइल एसोसिएशन के राजेंद्र जिंदगर के मुताबिक कोर्ट का जो फैसला आया है उसको लेकर रीको के साथ कंफ्यूजन है, क्योंकि यह मसले पहले ही सॉल्व हो चुके थे। बहरहाल इस मसले पर व्यापारी अपनी बात रखेंगे। जहां तक सीपीटी प्रोजेक्ट से जुड़ना है तो उसके लिए व्यापारी एकमत हैं। जैसे ही केंद्र का पैसा आएगा, प्रोजेक्ट का काम पूरा होगा।

पंपिंग स्टेशन की जमीन पर अतिक्रमण
सांगानेर टैक्सटाइल एसोसिएशन में रातलिया में पंपिंग स्टेशन के लिए जेडीए से 300 गज जमीन ली हुई है। हालांकि यह काम भी नहीं हो पाया है। इस पर व्यापारियों का कहना है कि संबंधित जमीन पर अतिक्रमण के मामले हैं। जिसके लिए हमने जेडीए को लिखा है। उन्होंने भरोसा जताया है कि जल्द ही वह अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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