जयपुर में डेढ़ साल में न 1500 बिल्डिंगों का सर्वे हुआ ना ही लिस्टिंग, 12 लाख का वर्कऑडर भी अधूरा

वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल परकोटे की साख बचाने के लिए दिसंबर 2020 तक निगम को जो चैलेंज पूरे करने थे, वे पूरे होने की सूरत में नहीं दिख रहे। डेढ़ साल में नगर की हेरिटेज सेल को इंटेक के जरिए 1500 से ज्यादा बिल्डिंग के सर्वे, लिस्टिंग का काम करना था, लेकिन अब तक वह भी नहीं हो पाया है। इसके अलावा करीब 12 लाख का वर्कऑर्डर भी अधूरा है।

यही नहीं ना ही ट्रेफिक मैनेजमेंट और फसाड इंप्रूवमेंट के काम हो पाए हैं। यानी जो 5 बड़े चैलेंज थे उनमें से एक भी पूरा हाेता नहीं दिख रहा है। इस बार तो काम नहीं करने बड़ा बहाना कोरोनावायरस भी है। लेकिन इससे पहले और मौजूदा समय में भी काम के लिए जो माहौल तैयार होना है, नगर निगम उसमें फेल ही है।

सबसे बड़ा चैलेंज : संरक्षण तो तब करेंगे जब अतिक्रमण हटेगा
परकोटे की संरक्षित दीवार से जगह-जगह छेड़छाड़ हो रही है। जबकि इसी दीवार में सुरक्षित, जिंदा शहर यूनेस्को को भाया था। अतिक्रमण हटाकर दीवार की टूटफूट को रीस्टोर करने के लिए हाईकोर्ट तक कह चुका। काम के लिए 30 करोड़ 67 लाख का बजट की सौंपा है। इसके बावजूद नगर निगम हमारे गौरवशाली इतिहास से हो रही छेड़छाड़ को नहीं रोक रहा।

बिल्डिंगों का सर्वे भी पूरा नहीं
यही हालात अहमदाबाद के सामने थे। वहां भी वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घेषित होने के बाद निगम को संरक्षण का काम देना था। भास्कर ने रिपोर्ट रखी थी कि वहां भी यूनेस्को के बताए काम नहीं किए तो उपलब्धि खारिज होने जैसे नौबत आ गई है। ऐसी ही गलती जयपुर भी कर रहा है। जयपुर में भी हेरिटेज संरक्षण के लिए बनी हेरिटेज सेल अब तक वर्किंग नहीं हुई है।

काेरोना से रुका काम
^ हमने नियम बनाने का काम किया है। बाकी कामकाज भी देख रहे हैं। इस बीच कोरोना के हालात से काम प्रभावित हुए। दीवार के अतिक्रमण आदि कामकाज होने हैं। -अरुण गर्ग, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम



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प्रतीकात्मक फोटो।


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