एम्स जाेधपुर में बीकानेर से आई 12 वर्षीय बालिका का सीआरआरटी मशीन पर डायलिसिस किया गया। एसएलआई बीमारी से पीड़ित बालिका का एम्स जोधपुर के शिशु राेग विभाग की डॉ. एलिजा मित्तल की देखरेख में इलाज किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उसे एसएलआई बीमारी के कारण यूरीन से खून आना और ऑटो एंटी बॉडी बनने लगी थी, जिससे किडनी व दिमाग पर असर पड़ने लगा।
बालिका की दोनों किडनी ने काम करना बंद कर दिया। उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उसका नॉर्मल की बजाय सीआरआरटी मशीन पर डायलिसिस करना तय किया गया। बालिका को एक बार कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी दी जा चुकी है, जिसमें उसका 6-8 घंटे डायलिसिस कर दो लीटर पानी निकाला गया। उसकी हालत में सुधार है।
एम्स में पहली बार दी गई कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी
एम्स में नेफ्रोलॉजी विभाग के शुरू होने के कुछ समय बाद से आई सीआरआरटी मशीन पर पहली बार किसी बच्चे का डायलिसिस किया गया है। यह मशीन बच्चों और वयस्क दोनों के लिए काम में ली जाती है। मशीन की खासियत यह है कि इसमें बहुत ही धीरे डायलिसिस किया जा सकता है। साथ ही यदि आवश्यकता हो तो 48-60 घंटे तक डायलिसिस किया जा सकता है, जबकि नाॅर्मल मशीन पर 4-6 घंटे ही डायलिसिस किया जा सकता है।
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