एक महीने से चल रहे सियासी दांवपेंचों से जन्मे विधायकों की खरीद-फरोख्त के तीन केस से पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके सहयोगी विधायक तो बच गए हैं, अब उनकी जांच एसीबी को ट्रांसफर की गई है। परंतु केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को अभी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पद के दुरुपयोग के मामलों में प्रदेश में एकमात्र उदाहरण जोधपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सोलंकी ही हैं, जिनकी गिरफ्तारी हुई थी, उसके अलावा कोई नहीं। यानी एसीबी अब पूरे दबाव में रहेगी।
हालांकि इन मामलों में सिर्फ खरीद-फरोख्त की बातें हैं, पैसों की डिमांड नहीं है। इसलिए किसी की गिरफ्तारी की संभावना तो लगभग खत्म है, इसलिए मुकदमों में फंसे लोकसेवकों को बड़ी राहत मिल गई है। इस तरह पायलट तो एसओजी से बच गए, परंतु केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अभी अटके हुए हैं, क्योंकि जयपुर एडीजे-8 ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के घोटाले में उनके विरुद्ध जांच के आदेश दिए थे, इसलिए एसओजी को उनकी भूमिका की तलाश करनी होगी। एसओजी के एडीजी अशोक राठौड़ का कहना है कि खरीद-फरोख्त के केस ट्रांसफर किए हैं, संजीवनी के केस की जांच चल रही है।
124-ए धारा हट गई 120-बी कहां टिकेगी
एसओजी ने सरकार गिराने की साजिश मानते हुए राजद्रोह की धारा 124-ए व 120-बी में तीनों केस दर्ज किए थे। अधिवक्ता महावीर सिंह का कहना है कि चूंकि एसओजी ने राजद्रोह की धारा मानी नहीं, इसलिए षड्यंत्र में शामिल करने वाली 120-बी भी नहीं टिकती, क्योंकि 120-बी मूल धारा के साथ ही मानी जाती है। अब जब मूल धारा ही नहीं है तो इसका भी कोई अर्थ नहीं रह जाता।
हॉर्स ट्रेडिंग में सचिन को राहत, संजीवनी घोटाले में शेखावत फंसे
सचिन पायलट
- 10 जुलाई को एसओजी ने सचिन और 16 विधायकों को नोटिस दिए थे।
- इस केस की जांच एसओजी ने बंद कर दी, क्योंकि यह कानूनी रूप से सही नहीं था। सचिन को बड़ी राहत।
- एसीबी ऑडियो सैंपल की एफएसएल जांच कराएगी, पद के दुरुपयोग में लोकसेवकों की गिरफ्तारी पहले कभी नहीं हुई।
- राहत क्यों? सियासी पेंच है, सीएम गहलोत के शब्दों में नरमी आ रही है, सचिन खेमे के विधायकों को संतुष्ट करने का प्रयास।
गजेंद्र शेखावत
- 23 जुलाई को जयपुर एडीजे-8 ने शेखावत और उनके परिजनों के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे।
- एक साल पुराने केस में पहले चार्जशीट हो चुकी है, उसमें शेखावत को आरोपी नहीं माना था। अब संदेह में है।
- सोसायटी के सीएमडी विक्रमसिंह के खातों से ट्रांसफर हुए पैसों की जांच कर शेखावत तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।
- राहत क्यों नहीं? सरकार गिराने की साजिश में बीजेपी का हाथ बता रहे हैं। इस घोटाले की आवाज अगले चुनाव में बुलंदी से उठाएंगे।
एसीबी की उलझन को यूं समझें
- एसओजी ने हाथ झटके तो एसीबी अपने हाथ क्यों जलाए? यह सवाल अफसरों में पैदा हो चुका है।
- जब आईपीसी की धारा 120-बी भी नहीं टिकेगी तो एसीबी को अपनी धारा 8 व 12 में नया केस दर्ज करना होगा।
- इसके दो तरीके हैं, पहला एसओजी सरकार को लिखे की केस एसीबी में दर्ज हो तो सरकार एसीबी में भेजेगी। तब नई एफआईआर होगी।
- दूसरा तरीका यह है कि कोर्ट यह माने की यह केस एसीबी का बनता है और वह जांच के आदेश देती है तो केस दर्ज होगा।
- अब सरकार व कोर्ट पर तय करेगा कि नया केस दर्ज करें अथवा पहले से चल रहे केस में ही इनकी पत्रावली को शामिल करें।
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