मेरी 65 साल की उम्र हो गई। भिवाड़ी को गांव से शहर बनता देखा है। अब आए दिन वारदाते होने की सुनता हूं। गनीमत मानता रहा कि कभी मेरे साथ घटना नहीं हुई। बुधवार सुबह रोज की तरह सुबह धारुहेड़ा के घर से भिवाड़ी के अलवर बाइपास पर अपनी दुकानों पर आया था।
यहां किसी को एक दुकान किराए पर देनी थी। उसमें कुछ मरम्मत चल रही थी। इसके लिए सामान लेने करीब 10.40 बजे पैदल ही रोड पार कर मार्बल मार्केट तरफ एक दुकान पर जा रहा था। मेरे साथ दो आदमी और एक महिला भी थी। रोड़ पार कर जैसे ही हम सड़क से नीचे से उतरे, एक बाइक पर दो जने बिल्कुल पास आकर रुके।
एक जने ने हेलमेट पहन रखा था। दूसरा युवक पीछे बैठा था, उसका मुंह नहीं ढका था। इसी युवक ने मेरे गले पर झपट्टा मारा और बाइक पर बैठकर चंद सेकंड में दोनों भाग गए। मैंने गले को टटोला तो सोने की 10 तोला की चेन गायब थी। जिसकी कीमत करीब 5.5 लाख थी। टी-शर्ट के एक-दो बटन भी टूट गए थे। मैंने शोर मचाया, तब तक बाइक सवार बदमाश भगतसिंह कॉलोनी से होते हुए जाते दिखे।
मुझे अंदाजा नहीं था, उनकी नजर पहले से थी
लगता है बदमाशों की नजर पहले से मुझ पर थी। पर मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था। सीसीटीवी फुटेज में देखा कि जब मैंने रोड़ पार करना शुरु किया, तभी बदमाशों ने मुझे निशाने पर ले लिया था। मैं रोड़ पार कर नीचे कच्चे में उतरा इतनी देर में वे आगे से घूमकर वापस मुझ तक आ पहुंचे। कुछ समझ पाता, इससे पहले ही गले से चेन लूटकर फरार हो गए। मेरे साथ पहली बार कोई घटना हुई, सकते में आ गया। भिवाड़ी अपना घर-आंगन जैसा है, यहां हर आदमी जानता है। कभी सपने में कल्पना नहीं थी कभी मेरे साथ ही ऐसा हो जाएगा। बदमाश बेखौफ होकर इस तरह घूम रहे हैं। जैसे उन्हें किसी का डर ही नहीं।
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