बसपा विधायकों के विलय मामले में स्पीकर काे नाेटिस, हाईकोर्ट ने आज सुबह 10:30 बजे तक मांगा जवाब

प्रदेश में चल रहे सियासी संकट के 27वें दिन शुक्रवार काे हाईकाेर्ट की खंडपीठ ने बसपा के छह विधायकाें के कांग्रेस में विलय के मामले में विधानसभा स्पीकर काे नाेटिस जारी कर एक दिन में जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह 10:30 बजे तय है। ऐसे में स्पीकर सीपी जाेशी काे इस समय तक जवाब देना हाेगा। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश भाजपा विधायक मदन दिलावर अाैर बसपा पार्टी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया। दिलावर की ओर से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने लंदन से वीसी के जरिए पैरवी की, जबकि बसपा की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सतीश मिश्रा ने लखनऊ से पैरवी की।

मांग : स्पीकर की ओर से जारी विलय के अादेश पर खंडपीठ राेक लगाए
दिलावर व बसपा ने अपनी अपीलों में हाईकाेर्ट की एकलपीठ की अाेर से 30 जुलाई काे जारी अंतरिम आदेश को चुनौती दी है। एकलपीठ ने स्पीकर की अाेर से 18 सितंबर 2019 काे विधायकाें के विलय काे लेकर जारी अादेश पर राेक लगाने से इनकार कर दिया था। सिर्फ पक्षकारों को नोटिस जारी किया था। अपील में कहा गया है कि 14 अगस्त से विधानसभा का सत्र है। विधायकों के बाड़ेबंदी में होने से नोटिस तामील नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में खंडपीठ स्पीकर के आदेश पर अंतरिम रोक लगाएं।

आपत्ति : खंडपीठ ने कहा- एकलपीठ से स्टे की अर्जी खारिज नहीं, हम क्यों सुनें
दिलावर व बसपा की अपीलों पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा- मामले मेंं लंबित याचिका में एकलपीठ ने स्टे एप्लीकेशन खारिज नहीं की है। ऐसे में खंडपीठ कैसे सुनवाई कर सकती है? इस पर बसपा के अधिवक्ता दीपक कैन ने कहा- मामले में एकलपीठ में लंबित याचिका में स्पीकर व विधानसभा सचिव को नोटिस तामील हो चुके, लेकिन बाड़ाबंदी में होने से 6 विधायकाें को तामील नहीं हो पा रहे। यदि स्पीकर के आदेश पर कोर्ट अंतरिम रोक नहीं लगाए तो बसपा विधायकाें काे नाेटिस तामील करवा दिए जाएं।

सुनवाई : एकलपीठ में 11 को फिर होगी बहस, स्पीकर को नोटिस दिया हुआ है
दिलावर व बसपा ने एकलपीठ में भी बसपा के 6 विधायकाें के विलय तथा स्पीकर के विलय के अादेश काे चुनाैती दे रखी है। इस पर 11 अगस्त काे सुनवाई है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर व सचिव सहित छह बसपा विधायकाें लखन सिंह, राजेन्द्रसिंह, दीपचंद, जोगेन्दर सिंह, संदीप कुमार व वाजिब अली से 11 अगस्त तक जवाब मांगा था। बसपा ने याचिका में गुहार की है कि जब तक मामला कोर्ट में लंबित रहे तब तक 6 विधायकाें को फ्लोर टेस्ट में किसी के पक्ष में वोट नहीं डालने दिया जाए।

इन विधायकाें के कांग्रेस में विलय के 18 सितंबर 2019 के आदेश को भी रद्द करने के साथ ही इन पर खिलाफ दल-बदलू कानून के तहत कार्रवाई की जाए। दिलावर ने एकलपीठ में कहा कि उन्हाेंने इस संबंध में चार माह पहले स्पीकर के समक्ष शिकायत की थी, लेकिन स्पीकर ने सुनवाई नहीं की। इसके बाद जब मामला हाईकोर्ट में आया तो आनन-फानन में तकनीकी आधार पर उनकी याचिका 22 जुलाई को खारिज कर दी और इसकी सूचना भी 24 जुलाई को दी गई, जबकि स्पीकर को तकनीकी खामियों के बावजूद भी याचिका में सभी पक्षों को सुनकर निर्णय करना चाहिए था।



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अशोक गहलोत (बाएं) और सचिन पायलट (दाएं)


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