बहुचर्चित राजा मानसिंह हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद उनके नवासे दुष्यंतसिंह ने कहा कि हमारे लिए यह स्वाभिमान और इंसाफ की लड़ाई थी। इसलिए 35 साल तक पहले मेरी मां पूर्व मंत्री कृष्णेंद्र कौर और पिछले 15 साल से मैं इस केस की पैरवी कर रहा था। मैं और मेरा परिवार इस फैसले से खुश हैं। क्योंकि आजीवन कारावास की सजा भी दोषियों के लिए इस उम्र में फांसी से कम नहीं है।
उन्होंने भास्कर से बातचीत में कहा कि पिछले 15 साल में तीन-चार बार ऐसे मौके भी आए जिनसे लगता था कि फैसला अब आ जाएगा। क्योंकि फाइनल बहस के बाद फैसला आने की उम्मीद रहती ही है। लेकिन जज अथवा वकील बदलने के कारण आरोपियों द्वारा कोई न कोई बहाना बना कर अपील लगा दी जाती थी। इसमें देरी इसलिए भी ज्यादा हुई क्योंकि हम इंसाफ के लिए लड़ रहे थे और दोषी केस को टालने के लिए। चूंकि इसमें 78 गवाह और एक हजार से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स थे।
इसलिए हर बार नए सिरे से सुनवाई होती थी। हमें कई बार हताशा भी होती थी। लेकिन, राजा साहब के प्रति लोगों के भावनात्मक जुड़ाव ने हमें ऊर्जावान बनाए रखा। बल्कि इस जीत में आमजन की भावनात्मक शक्ति भी जुड़ी हुई है। क्योंकि राजा साहब हमारे लिए तो अनमोल थे ही वे आमजन के भी दिलों में बसे हुए थे। इसलिए हम कभी हताश नहीं हुए। हमें उम्मीद थी कि दोषियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। लोगों की भावना के अनुरूप फैसला आया है। हम इस फैसले से संतुष्ट हैं। न्याय भले ही लंबे इंतजार के बाद आया, लेकिन देर से ही सही दोषियों को उनके किए की सजा मिली है।
भरतपुर में मानसिंह सर्किल और डीग में शहीद स्थल पर दी जाएगी श्रद्धांजलि
राजा मानसिंह को गुरुवार को सुबह 10 बजे भरतपुर में बिजली घर सर्किल स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी जाएगी। कार्यक्रम में उनकी बेटी एवं पूर्व मंत्री कृष्णेंद्र कौर और भाजपा नेता दुष्यंतसिंह मौजूद रहेंगे। बाद में वे डीग जाएंगे, जहां चौड़ा बाजार स्थित शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 21 फरवरी 1985 को पुलिस कर्मियों ने राजा मानसिंह और उनके दो साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। कोर्ट ने तत्कालीन डीएसपी कानसिंह भाटी, एसएचओ वीरेंद्रसिंह समेत 11 पुलिस कर्मियों को उम्र कैद एवं जुर्माने की सजा सुनाई है।
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