एक माह बाद गणेश महाेत्सव है। अमूमन इतने दिन पहले शहर में जगह-जगह मूर्तिकारों के तंबू लगने शुरू हाे जाते हैं। लेकिन, इस बार शहर ये मूर्तिकार कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी पीछे काेराेना महामारी का असर माना जा रहा है। लगातार बढ़ रहे काेराेना संक्रमण मामलाें ने गणेश मंडलाें काे भी पशाेपेश में ला दिया है। मंडल हर बार की तरह इस बार भी मूर्ति स्थापना करना चाहते हैं लेकिन काेराेना संक्रमण का भी डर है। यहीं वजह है कि अब तक कई मंडलाें ने मूर्ति बनाने के ऑर्डर भी नहीं दिए है। मंडलाें का मानना है कि परंपरा बनी रहे लेकिन महामारी भी नहीं फैले।
इसलिए कई मंडल इस बार आयाेजन का बहुत सीमित करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, मंडलाें का साफ कहना है कि आयाेजन काे लेकर वह आगामी प्रशासन की गाइड लाइन के बाद ही काेई अंतिम निर्णय लेंगे। तेजी से बढ़ रही इस महामारी ने इस बार मूर्ति बनाने वाले कलाकार से लेकर टेंट, डीजे और इससे संबंधित व्यापारियाें की चिंता भी बढ़ा दी है।
शहर की बात करे ताे यहां अमूमन 250 के करीब बड़े मंडल हैं इसके अलावा हजाराें की संख्या में घराें में अलग से भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजित की जाती है। यह महाेत्सव कितना भव्य हाेता है इसका अंदाजा गणेश विर्सजन जुलूस काे देखकर साफ पता चलता है। करीब दाे से ढाई किमी लंबे इस जुलूस में गांवाें से भी गणेश मंडल शामिल हाेते हैं। इस एक दिन में ही डायलाब तालाब पर छाेटी-बड़ी 3 हजार से ज्यादा मूर्तियाें का विसर्जन किया जाता है। ऐसे में अंजादा लगाया जा सकता है कि इस बार काेराेना की वजह से आयाेजन काे लेकर गणेश मंडल बेहद फिक्रमंद है।
वैसे ताे अब तक शहर में एक भी मूर्ति बनाने वाले कलाकाराें के टेंट नजर नहीं आ रहे है लेकिन, कूपड़ा मार्ग पर स्थित स्थानीय मूर्ति कलाकार मांगीलाल से भास्कर संवाददाता ने बातचीत कर हकीकत जानने की काेशिश की। मांगीलाल ने बताया कि अमूमन इन दिनाें गणेश प्रतिमा बनाने के लिए कई आ जाते हैं लेकिन इस बार एक भी ऑर्डर मंडलाें से अब तक नहीं मिला है। उन्हाेंने बताया कि इस बार पीओपी और जरूरी विशेष घास भी बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हाे रही है। वहीं अब काेराेना संक्रमण और कम दिन ही हाेने की वजह से खुद भी ऑर्डर नहीं ले रहा।
मंडलाें का कहना: गाइडलाइन की करेंगे पालना
आजाद चाैक के वागड़ मंडल के रामभाई ने बताया कि गणेश महाेत्सव मनाया जाएगा। मूर्ति के लिए ऑर्डर देंगे। लेकिन, यह आगामी हालात पर भी निर्भर करता है। हमें आस्था और जनसुरक्षा दाेनाें काे ध्यान में रखना जरूरी है। संक्रमण न फैले इसलिए सभी जरूरी एहतियाती उपाय अपनाए जाएंगे। मंडल कार्यकर्ता भी पारियाें में सेवा दे सकेंगे। उजाला ग्रुप के सुमितभाई बताते है कि हम चाहते है कि जाे परंपरा चली आ रही है वह बनी रहे।
हर साल की तरह इस साल भी मूर्ति स्थापना और पूजन हाे। लेकिन, हमें यह भी ध्यान रखना हाेगा कि इस बार हमारे सामने काेराेना महामारी भी है। इसलिए छाेटी मूर्ति स्थापित कर और सीमित कार्यक्रम करने पर विचार कर सकते है। हालांकि, स्थिति प्रशासन के आगामी आदेशाें के बाद साफ हाेगी। डंडेश्वर महादेव मंदिर मंडल के नीतेश साेनी का कहना है कि आयाेजन राेकना नहीं चाहते है लेकिन महामारी के चलते जनहित में हम भव्यता कम सकते है जिससे की भीड़ ज्यादा नहीं जुटे और संक्रमण फैलने का डर भी नहीं रहे।
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