पहली बार प्रदेश कांग्रेस की लीड टीम बर्खास्त, भाकर बोले; मैं चुनाव जीतकर प्रदेशाध्यक्ष बना, पार्टी कौन हटाने वाली?
राजस्थान की सियासत में सीएम-डिप्टी सीएम धड़ों की खींचतान के चौथे दिन यहां सत्ता और संगठन बड़ा बदलाव हो गया। डिप्टी सीएम सहित 3 मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित युवा कांग्रेस अध्यक्ष, सेवादल संगठन के प्रमुख राकेश पारीक को बर्खास्त कर दिया।
पायलट को बर्खास्त करने के विरोध में एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहला मौका होगा जब किसी राजनीतिक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित 3 प्रमुख संगठन अध्यक्षों को ऐसे हटाया गया है।
इस बीच, बगावत के तेवर ज्यादा उग्र और मुखर हैं। वे पार्टी के फैसले को एकतरफा बता रहे हैं। यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष रहते सचिन पायलट खेमें में खुले तौर से जुड़े मुकेश भाकर ने तो इतना तक कह दिया- मैं ताे चुनाव जीतकर यूथ कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बना हूं, कांग्रेस पार्टी या मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत काैन हाेते हैं मुझे हटाने वाले..। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यू पूनिया ने कहा- सरकार तानाशाही से चल रही है। मैं सचिन पायलट के समर्थन में इस्तीफा दे रहा हूं। सरकार को नतीजा भुगतना पड़ेगा।
‘सरकार और पार्टी के मंच पर नहीं हो पा रही थी सुनवाई, क्या करते? मेरे विभाग ने सबसे
अच्छा काम किया था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी राजस्थान की तारीफ की थी’
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के पद से बर्खास्त रमेश मीणा ने राज्य सरकार और कांग्रेस पर जोरदार हमला किया है। मीणा ने कहा कि सरकार और पार्टी के मंच पर हमारी कतई सुनवाई नहीं हो रही थी, जिसके कारण हमें यह कदम उठाना पड़ा है। गहलोत और वसुंधरा के बीच गठजोड़ हैं। इस बात काे मैंने कई बार केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे को साक्ष्यों के साथ बताया था, लेकिन आलाकमान हमारी बातों को सुनने के लिए तैयार नहीं था।
पिछली सरकार के कार्यकाल के मामलों की जांच करने के लिए जो कमेटी बनाई थी, उसे क्यों भंग की गई। क्योंकि मैं एकमात्र ऐसा व्यक्ति था, मैं एक्शन लेने के लिए बात करता था, लेकिन सरकार और कमेटी के सदस्य अफसरों से बार्गेनिंग करते थे। पूर्व में लिए गए गलत कामों को भी सही ठहरा रहे थे। गहलोत कैबिनेट की मीटिंग नहीं करते थे, सर्कुलेशन के जरिए खुद फैसले लेते थे। यहां तक किकोरोनाकाल में अफसरों की कोर टीम बनाकर खुद निर्णय कररते रहे, मंत्रियों को पूछा तक नहीं, इससे बड़ा अपमान और क्या होगा?
किसके इशारे पर राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी राजनीति कर रही है, मंत्रियों को अपमानित किया जा रहा है
पर्यटन मंत्री पद से बर्खास्त विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि हमने आज तक कोई पार्टी विरोधी बयान नहीं दिया। हम तो पार्टी आलाकमान का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे, हमारी सुनवाई नहीं हो रही। कोई बात नहीं, मैं वैसे ही जनता की अब ज्यादा सेवा कर पाऊंगा, लेकिन जिस तरह से ब्यूरोक्रेसी राजनीति कर रही थी। मंत्रियों को अपमानित कर रही है, वह कतई ठीक नहीं है। जब भी मैंने भ्रष्टाचार रोकने के लिए कहता था तो ब्यूरोक्रेसी राजनीति करने लगती थी।
मेरी मीटिंग में प्रमुख सचिव तक नहीं आती है। जिस सचिन ने कांग्रेस को 20 सीटों से सत्ता तक पहुंचाया, उसे राष्ट्रद्रोह का नोटिस थमा दिया। इससे बड़ा किसी व्यक्ति के लिए अपमान क्या हो सकता है? इस पर कांग्रेस आलाकमान ने एक शब्द तक पूछा नहीं। पार्टी की ओर से जो चुनावी घोषणा पत्र जारी किया गया था। उस पर काम नहीं किया जा रहा था। डेढ़ साल से प्रदेश में विकास ठप था।
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