सीएम से सवाल : बर्खास्त क्यों किया ? हमने तो पार्टी के खिलाफ कोई बयान भी नहीं दिया था

मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी पर विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि हम तीनों मंत्रियों ने कहां पार्टी के खिलाफ बयान दिया है। हम तो केवल हाईकमान का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे। सरकार बने करीब पौने 2 साल हो गए। मेनिफेस्टो में जो वायदा किया था, बिजली-पानी, कर्जमाफी का। वह भी डिलीवर नहीं कर पा रहे हैं। मैं यह सवाल रखना चाहता हूं कि आखिर क्यों हम तीनों को बर्खास्त किया गया।

वैसे अपनी बर्खास्तगी की मुझे चिंता नहीं है। बल्कि अब और अच्छे तरीके से जनता के बीच रहकर काम करूंगा। लेकिन, मैं सीएम से पूछना चाहता हूं कि जनता ने हमको और कांग्रेस पार्टी को चुन कर भेजा है। अब मुख्यमंत्री जनता को क्या जवाब देंगे। रात 8.30 बजे उन्होंने फिर ट्वीट करके कहा कि आज तो 20-20 था, कल से टेस्ट मैच चालू है। अब आगे देखते जाओ होता है क्या। उन्होंने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की।

ट्वीट-“काटकर जुबान मेरी कह रहा है वो जालिम, तुझे इजाजत है हाल ए दिल सुनाने की”

मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद विश्वेंद्र सिंह का दर्द झलक आय़ा। उन्होंने सबसे पहले दोपहर 1.40 बजे ट्वीट कर कहा कि “काट कर जुबान मेरी कह रहा है वो जालिम, अब तुझे इजाजत है हाल ए दिल सुनाने की” जबकि इससे पहले 10.11 बजे किए ट्वीट में कहा था कि “मैं बोलता हूं तो इल्जाम है बगावत का, मैं चुप रहूं तो बड़ी बेबसी सी होती है....” फिर 10.41 बजे उन्होंने एक और नया ट्वीट किया और बोले- “मेरी फितरत ही कुछ ऐसी है कि, गालिबन सच कहने का लुत्फ उठाता हूं मैं” इसके बाद दोपहर 3 बजे उन्होंने नया ट्वीट करक कहा कि “वह दिन जिसका वादा है जो लौह ए अजल में लिखा है....हम देखेंगे।“ इस तरह मंगलवार को उन्होंने कई ट्वीट किए।

डीआईजी विकास कुमार देर रात भरतपुर पहुंचे

विरोध प्रदर्शन और अशांति की आशंका को देखते हुए सरकार ने भरतपुर, धौलपुर, करौली और सवाईमाधोपुर में अलर्ट घोषित कर दिया। पुलिसवालों की छुटि्टयां रद्द करने के साथ ही चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग और नदबई विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना के आवासों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एतिहायत के तौर पर हालात संभालने के लिए डीआईजी विकास कुमार देर रात भरतपुर पहुंचे।

अल्पसंख्यक कोटे में जाहिदा खान को मिल सकता है मौका

राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच सरकार में भरतपुर संभाग का प्रतिनिधित्व कम हो गया है। क्योंकि दो कैबिनेट मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह (डीग-कुम्हेर) और रमेश मीणा (सपोटरा-करौली) को हटा दिया गया है। हालांकि मंत्रिमंडल पुनर्गठन की कवायद शुरू हो गई है। इसके साथ ही भरतपुर जिले की राजनीति में भी बदलाव के संकेत हैं। माना जा रहा है कि अल्पसंख्यक महिला होने के कारण जाहिदा खान को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। वे पहले भी गहलोत सरकार में संसदीय सचिव रह चुकी हैं।

जाहिदा खान चुनाव जीतने के बाद से ही मंत्री बनाए जाने की दावेदारी कर रही थीं, लेकिन भरतपुर जिले से 3 मंत्री बन जाने के कारण उन्हें यह मौका नहीं मिल पा रहा था। वहीं, गुर्जर वोटों को साधने के लिए नदबई विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना को संसदीय सचिव अथवा किसी बोर्ड-कॉरपोरेशन में एडजस्ट किया जा सकता है। भरतपुर जिले की 7 में 4 सीटों बयाना, नगर, नदबई और कामां सीटों पर गुर्जर मतदाताओं का खासा प्रभाव है।

यहां के लोगों का स्वभाव बगावती है एक हद के बाद आवाज उठाते ही हैं

प्रदेश की राजनीति में भरतपुर का हमेशा ही दखल रहा है। चूंकि यहां के लोगों का स्वभाव थोड़ा बगावती है। इसलिए एक हद के बाद आवाज उठाते ही हैं। इस समय मेरे जेहन में दो घटनाक्रम आ रहे हैं। वर्ष 1952 में जयनारायण व्यास और 1990 में भैरोंसिंह शेखावत का कार्यकाल था।.

तत्कालीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के समय कांग्रेस में विद्रोह की स्थिति बनी तो तब केंद्रीय मंत्री बाबू राजबहादुर सीएम व्यास के समर्थन में आ खड़े हुए थे। जबकि दूसरे कद्दावर नेता मास्टर आदित्येन्द्र थे। इसी तरह वर्ष 1990 में भाजपा और जनता दल की संयुक्त सरकार थी। तब मैं भरतपुर से जनता दल का विधायक था।

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को बिहार के तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव ने रोककर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इससे भाजपा और जनता दल के रिश्ते बिगड़ गए। उस समय तत्कालीन सीएम भैरोंसिंह शेखावत ने जनता दल (दिग्विजय) का समर्थन लेकर उन्होंने अपनी सरकार बचा ली थी। तब भी भरतपुर पर ही फोकस था। क्योंकि जनता दल विधायक संपत सिंह और मदन मोहन सिंघल भैरोंसिंह शेखावत के साथ चले गए।

मैं खुद, नत्थीसिंह और यदुनाथ सिंह मूल जनता दल में ही रहे। जबकि भैरोंसिंह जी से हमारे काफी अच्छे ताल्लुकात थे। संपत सिंह और मदन मोहन सिंघल को सरकार के साथ जाने का फायदा मिला और वे मंत्री बन गए। दरअसल समय के साथ राजनीति में भी बहुत सी चीजें बदली हैं। आज धन-बल का प्रभाव ज्यादा है। पल-पल में नेता बात बदल लेते हैं।



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Question to CM: Why was he dismissed? We did not even make any statement against the party


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