जिले में कोरोना मरीजों की संख्या 450 से पार पहुंच चुकी है। चार महीने से हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके इलाज पर सिस्टम की लापरवाही इतनी भारी पड़ रही है कि जिला मुख्यालय पर कोविड केयर सेंटर खोलने के लिए मिले ढाई करोड़ रुपए के बजट का उपयोग तक नहीं कर पाए। जिसका नतीजा यह हुआ कि हमारे यहां गंभीर श्रेणी से लेकर सामान्य श्रेणी और बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों का इलाज एक ही जगह बीडीके अस्पताल के कोरोना वार्ड में होता रहा।
जो सीधा सीधा कोरोना इलाज के लिए बनी गाइडलाइन के खिलाफ है। चौंकाने वाली बात ये है कि सीएमएचओ कार्यालय ने इस बजट से कोविड सेंटर के लिए जरुरी उपकरण तो खरीद लिए, लेकिन वे डिब्बों में ही बंद है। इधर, बीडीके अस्पताल में ही कोरोना वार्ड के कारण दूसरी बीमारी के मरीजों को दिक्कत हो रही है।
ऐसे में अब पीएमओ ने इस वार्ड में केवल गंभीर मरीजाें का इलाज करने का का फैसला लेते हुए कलेक्टर को पत्र भेजा है। अब एक ओर तो लापरवाही के कारण दो महीने से कोविड केयर सेंटर नहीं खुला और दूसरी ओर कोरोना वार्ड में गंभीर मरीजाे के अलावा अन्य का इलाज भी बंद हो सकता है। जिसके बाद आनन फानन में अब सीएमएचओ ने सेंटर खोलने के लिए शहर में दो-तीन भवनों को देखा है लेकिन सवाल उठता है कि दो महीने से यह लापरवाही क्यों बरती गई।
सवाल पूछने पर अब कह रहे जल्द खोल देंगे
उमरदीन खान, कलेक्टर : जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हैं। कोरोना में तो खास तौर पर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी इन पर ही थी।
नतीजा : बजट की खबर ही नहीं ली। ऐसे में दो महीने से सेंटर बन ही नहीं पाया।
अब कह रहे हैं, जल्दी खोल देंगे।
डॉ. छोटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ : बजट इनके पास ही आया। सामान भी खरीद लिया, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं किया।
नतीजा : बाकी सभी जिलों में यह सेंटर बन गया। हमारे यहां नहीं बन पाया। कोरोना मरीज परेशान होते रहे, कहा-खोलेंगे तब बता देंगे।
इसलिए खोला जाना था कोविड केयर सेंटर
कोरोना पॉजिटिव केसेज में 70 प्रतिशत मामले ऐसे थे जिनमें कोरोना के लक्षण या तो थे ही नहीं या बेहद हल्के थे। ऐसे में इन मरीजो को कोरोना के गंभीर मरीजों के साथ नहीं रखा जा सकता था। जिस पर सरकार ने 4 मई को हर जिला मुख्यालय पर कोविड केयर सेंटर खोलने के आदेश दिए। यहां बिना लक्ष्ण या हल्के लक्षण के मरीजों को रखना था। इसके लिए ढाई करोड़ रुपए का बजट दिया गया।
बीडीके में कोरोना वार्ड के नाम पर किया गुमराह
कोरोना के बढ़ते असर के बीच अप्रेल माह में बीडीके अस्पताल में कोरोना वार्ड बना दिया गया। नियमानुसार इस वार्ड में केवल गंभीर मरीजों का इलाज किया जाना था। जबकि विभाग यहां सभी तरह के मरीजों को भर्ती करता रहा।
तीन महीने से इस वार्ड के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। कोविड केयर सेंटर को लेकर कोई पहल नहीं की गई। जिससे सभी ने सोचा कि कोरोना के लिए यही एक यूनिट है। जिले में 15 अप्रेल के बाद आए सभी मरीजों को यहीं पर रखा गया।
पीएमओ ने लिखा पत्र, केयर सेंटर खोलिए
बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. शुभकरण कालेर ने कलेक्टर को एक पत्र भेजा है। जिसमें 14 जुलाई से गंभीर मरीजोंं का ही इलाज बीडीके के कोरोना वार्ड में करने की बात कही है। पत्र में पीएमओ ने कम लक्षण या बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर सेंटर की जानकारी मांगी है जबकि हमारे यहां यह सेंटर अभी तक खुला ही नहीं है।
भारी पड़ रही यह लापरवाही
बीडीके अस्पताल में ही कोरोना वार्ड बना है। वहां दूसरी बीमारियों के मरीज भी आते हैं। उन्हें दिक्कत हो रही है।
पिछले तीन महीने से गंभीर व सामान्य और बिना लक्षण वाले मरीजों को एक ही जगह रखा गया। जिससे संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ा
डॉक्टर्स को कोरोना के गंभीर व सामान्य मरीजों का एक साथ इलाज करना पड़ रहा है। उनके पास बेवजह मरीजों की संख्या बढ़ी।
जब सरकार ने ढाई करोड़ रुपए देकर अलग से सेंटर खोलने के आदेश ही दे दिए तो क्यों नहीं खोला गया यह सेंटर
सीधी बात
जिले में अब तक काेविड केयर सेंटर नहीं बना है?
सीएमएचओ और पीएमओ ने कई जगह देखी है। उनमें एक जगह फाइनल कर जल्द ही काेविड केयर सेंटर बना रहे है। जिला मुख्यालय के साथ आठ ब्लाॅक में एक-एक सेंटर और बनाने वाले है।
बजट आने के बाद भी नहीं बन पाया सेंटर, वजह क्या रही?
चिकित्सा विभाग ने टेंडर निकाले और 27-28 जून काे खरीददारी कर चुके है। इसमें कुछ समय लगा है।
काेराेना मरीजाें का इलाज बंद करने की बात सामने आ रही है?
तीन दिन पहले पीएमओ और सीएमएचओ के साथ बैठक की थी। जिसमें माइल्ड और नाॅन सिम्टाेमैटिक मरीजाें काे काेविड केयर सेंटर में रखने की बात हुई थी।
क्या काेराेना मरीजाें काे परेशानी हाेगी?
बिल्कुल नहीं, किसी भी मरीज काे इलाज के लिए परेशान नहीं हाेने देंगे। ये मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। वैसे अभी तय नहीं कि मंगलवार से बीडीके अस्पताल में केवल गंभीर मरीजाें का ही इलाज करेगे।
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