कोरोना काल में भ्रष्टाचार और संवेदना, कांग्रेस में उथल-पुथल, आधा शहर कफ्र्यू में, व्यवस्था नाकाफी

हरीश बी.शर्मा
हजार का आंकड़ा पार करते कोरोना के लिए अब नई-नई बातें सामने आने लगी है। कहा जा रहा है कि इसके नाम पर भ्रष्टाचार के नये-नये रास्ते खुल गए हैं। पीबीएम अस्पताल में भ्रष्टाचार के तो कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन अब तो जिला प्रशासन से स्वास्थ्य विभाग तक निशाने पर है। स्वास्थ्य विभाग के लिए तो पिछले कलेक्टर कुमारपाल गौतम के समय से ही एक जांच चल रही है, लेकिन जिला प्रशासन के कामकाजों में भी अब कमियां ढूंढ़ी जाने लगी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत लोगों को अनाज नहीं मिल रहा है तो कोविड सेंटर में भर्ती मरीजों के लिए भोजन व चाय की व्यवस्था लडख़ड़ाई हुई है। कई क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए, भवनों के एसी बंद कर दिए गए हैं। कूलर हैं नहीं। जब, इन भवनों के लिए निर्धारित राशि का चुकारा नहीं हो रहा है। पता चला है कि यहां भी बड़ा घपला है। पूर्व जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने जरूर एक बार जाकर भोजन चखा था और अक्षय-पात्र योजना की तर्ज पर खाना बनाने की सलाह ठेकेदार को दी थी। खाना वैसा ही मिल रहा है, कुछ लोगों ने तो इसी परेशानी के चलते घर का खाना भी मंगवाना शुरू कर दिया। प्रशासन जांच करे तो पता चलेगा कि अधिकांश मरीजों के चाय, नाश्ते और खाने की व्यवस्था बाहर से ही हो रही है।

 

हालांकि, जिला कलेक्टर नमित मेहता के कोविड सेंटर में पीपीइ किट पहनकर जाने से लोगों का डर कम हुआ है। इस बीच कोरोना से मरने वालों के प्रति अछूत जैसा व्यवहार करने की बजाय उनकी एडवायजरी के तहत अंत्येष्टि करवाए जाने के लिए शहर के कुछ युवा आए हैं। शहर कांग्रेस के महासचिव आनंद जोशी ने शव के श्मशान में पहुंचने से पहले ही चिता संबंधी सारी व्यवस्था करने का बीड़ा उठाया है। इस टीम में दुर्गाशंकर आचार्य ‘टन्नू’, अनिल आचार्य ‘अनाकटी़’, नरेंद्र आचार्य, अविनाश आचार्य, अमित व्यास शामिल हैं। इधर, जमीयत उलामा और अलकासिम वैलफेयर ट्रस्ट नाम के संगठन ने भी इस तरह की पहल की है। मौलाना मोहम्मद इरशाद कासमी, मुफ्ती सद्दाम हुसैन कासमी, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद राशिद कोहरी ने इस संबंध में सूचना दिये जाने की बात की है। कारोना के प्रारंभिक दौर में शव के अंतिम संस्कार को लेकर जबर्दस्त डर का माहौल था। एक मौत के दौरान तो हालात यह बन गए थे कि मौहल्ले वाले नहीं चाहते थे कि शव को घर लाया जाए और श्मशान क्षेत्र में रहने वाले अंतिम संस्कार नहीं कराने देने पर अड़े थे। इस दौरान घड़सीसर रोड पर बने श्मशान के प्रबंधकों ने बड़ा फैसला किया। योग शिक्षक विनोद जोशी ने घोषणा की कि अगर कहीं भी जगह नहीं मिले तो कोरोना पॉजीटिव के दाह संस्कार के लिए यह मुक्तिधाम खुला है। पूर्व पार्षद आदर्श शर्मा पहले से ही लावारिसों की लाशों का अंतिम संस्कार करवा रहे हैं, कोरोना काल में भी सक्रिय हैं।

कोरोना काल में इस तरह के संवेदनशीलता के उदाहरण भी है तो गुटखे की कालाबाजारी के भी उदाहरण है, जिसमें लोगों ने भले ही सेवादारों से लेकर खाना खाया हो, लेकिन पांच रुपये के गुटखे के चालीस रुपये अदा किये हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, कोरोना ने कई रंग दिखाये हैं।

हर ओर कोविड छाया हुआ है। तीन थाना क्षेत्रों में शामिल हुआ आधा बीकानेर कर्फ्यू की चपेट में आया हुआ है, लेकिन कहीं-कहीं तो जैसे प्रशासन कर्फ्यू लगाकर भूल गया है जैसे। यहां एक अर्दली तक दिखाई नहीं देता। कुछ दिन तो लोग डरे हुए रहते हैं, फिर अपने-अपने काम के लिए निकल जाते हैं। कारोना के काल में भूख तो लगती ही है, कोई करे तो क्या करे।

राजनीति की बात करें तो कांग्रेस अभी नगर निगम में मनोनीत पार्षद, नेता प्रतिपक्ष जैसे मसलों पर ही लड़ रही थी कि प्रदेश में सियासी बवाल मच गया। बीकानेर में हालांकि अशोक गहलोत का प्रभाव है, लेकिन सचिन पायलट के कुछ समर्थक भी हैं। कांग्रेस के नेता सवालों का घुमा-फिराकर जवाब देते हैं। प्रदेशाध्यक्ष बदल जाने के कारण, प्रदेश इकाइयां भंग होने के कारण यशपाल गहलोत और महेंद्र गहलोत आशंकित है। इस सियासी बवाल में पता नहीं किसने फिर से डॉ. बीडी कल्ला के मुख्यमंत्री बनने की बात छेड़ दी है। पक्का यह व्यक्ति डॉ.कल्ला का शुभचिंतक नहीं हो सकता। इतिहास साक्षी है कि जब-जब डॉ. कल्ला को लेकर ऐसी बातें सामने आई है, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी है। सफाइयां देनी पड़ी है। इस पूरे एपिसोड में सबसे बड़ा नुकसान रामेश्वर डूडी को झेलना पड़ा। जाट कोटे से उनका पहला दावा प्रदेश-अध्यक्षी पर था, लेकिन अपेक्षाकृत कमजोर, लेकिन गहलोत के खास माने जानें वाले गोविंद डोटासरा बाजी मार ले गए। डोटासरा के पास पहले से ही अच्छा विभाग था, उन्हें यह नहीं भी मिलता तो कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन रामेश्वर डूडी को संजीवनी मिल सकती थी। हालांकि, यह भी हम जानते हैं कि राजनीति में संजीवनी देने की बजाय बैसाखियां दी जाती है। इस राजनीतिक घमासान के हमारे बीकानेर का एक माकपा विधायक चर्चा में है। कोई नहीं जानता वे कहां है, दावा है कि वे बड़ी बाज़ी खेलने की फिराक में हैं।

इस बीच नोखा में नकली भुजिया बनाने का कारखाना भी पकड़ा गया है। पाकिस्तान से आई टिड्डियां परेशान कर ही रही है। लेडि एल्गिन स्कूल के पास जौहरी से लूट के प्रकरण में पकड़े गये बदमाश बाइक चोर निकले हैं। भारत माला प्रोजेक्ट में अधिगृहीत जमीन का मुआवजा देने के आदेश दे दिये गये थे, यह आंदोलन लंबा चला था। छात्रनेता सतपाल की स्मृति में रोटरी क्लब में रक्तदान का कार्यक्रम आयोजित किया गया। सतपाल एक ऐसा छात्र नेता था, जिसने बीकानेर में विश्वविद्यालय का सपना देखा था, आज जब यह सपना पूरा हुआ है तो वह नहीं है। अच्छी बात यह है कि उसे याद करने वाले हैं, इस शहर के लोग कृतघ्न नहीं हैं।
मैं अपनी इबादत खुद ही कर लूं तो क्या बुरा है
किसी फकीर से सुना है कि मुझमें भी खुदा है

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