पत्नी के जिंदा होते हुए पौत्र को किया भुगतान

(अजीम कुरेशी)श्रम विभाग में एक के बाद एक घोटाला सामने आने के बाद कलेक्टर ने कार्रवाई की बात कही है। वहीं दूसरी ओर अब तक भास्कर द्वारा उजागर किए जा रहे घोटालों का गहनता से अध्ययन करने पर एक बात साफ हो गई है कि कोई रैकेट हैं जो विभाग में गहरी सेंध रखता है। वह विभाग को श्रमिक डायरी बनाने एवं भुगतान के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता है।
भाड़ौती निवासी बद्री लाल पुत्र आशाराम मीणा। जिसका घोटाला भास्कर ने उजागर किया है। उसमें कई तथ्य ऐसे हैं। जो इस बात का शक पुख्ता करते हैं कि सब कुछ विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिलीभगत से ही किया गया होगा।
पहली बात तो बद्रीलाल मीना के नाम से हुआ यह भुगतान पूरी तरह फर्जी हैं। अपने आपको बेदाग साबित करने का प्रयास कर रहे विभाग के अधिकारियों में से कोई भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि अगर बद्रीलाल की मौत हो गई थी तो उसका पैसा लेने का अधिकारी कौन था। कानूनी रूप से जानकारों के अनुसार यह पैसा उसकी पत्नी हंसी देवी को ही दिया जा सकता है।

अगर हंसी देवी की भी मृत्यु हो जाती तो दावा करने वाले को हंसी देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र साथ लगाना चाहिए था और उसके बाद उसका बेटा बद्रीलाल का पैसा लेने का हकदार होता है। अगर बेटा भी मर जाता हैं तो उसके बाद बेटे के मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ पौत्र को दस्तावेजों के साथ अपना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र देना होता है। इसी के बाद उसका पौत्र राकेश जिसे यह भुगतान किया गया, वह यह पैसा लेने का अधिकारी है।

पति जीवित फिर भी पत्नी को एकल नारी पेंशन
मृत्यु प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े के बाद मृत्यु की तिथि को लेकर एक दूसरा पेच भी है। मृतक बद्रीलाल मीना की पत्नी का नाम राशनकार्ड में हंसी देवी हैं। हंसी देवी ने एकल नारी पेंशन योजना के तहत 21 जून 2019 को आवेदन किया था। यह आवेदन विधवा या परित्यक्ता बुजुर्ग महिला द्वारा किया जाता है। अर्थात 21 जून 2019 को हंसी देवी का पति नहीं था।

इस तारीख को आवेदन करने का मतलब है, उसके पति बद्रीलाल मीना की मृत्यु इस तिथि से पूर्व को हो चुकी थी और उसकी मृत्यु तिथि के आधार पर ही उसने एकल नारी पेंशन योजना में आवेदन किया था, जिसका पीपीओ नं. आरजे-एस-0929 है। इसी आवेदन एवं पीपीओ नं. के आधार पर हंसी देवी को विधवा मानते हुए सरकार उसे 21 मई 2019 से एकल नारी पेंशन का लाभ दे रही है।

अगर हंसी देवी का पति बद्रीलाल मीना 21 जून 2019 से पूर्व मर चुका था तो फिर 28 मई 2020 को दुबारा मरने वाला बद्रीलाल मीना नाम का ही दूसरा पति कहां से आ गया। अहम बात यह हैं कि इस बार लगाया गया मृत्यु प्रमाण पत्र मूल रूप से नर्मदा के नाम से जारी है। अर्थात पूरा फर्जीsawवाड़ा किया गया।

उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र संलग्न करना जरूरी
^बैंक या सरकारी पैसे के मामले में हकदार की मृत्यु होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र संलग्न करना होता हैं। जब तक यह नहीं होता हैं। सरकारी पैसे का भुगतान उसके उत्तराधिकारी को नहीं किया जा सकता। -संजय बोहरा, एडवोकेट



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