ग्राम पंचायत कड़ैयानोहर के सरपंच भवानीशंकर मालव ने राज्य सरकार से पंचायतों में ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग की है। सरपंच मालव ने बताया कि शनिवार को ग्रामीणों ने ठेकेदारों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।
जिसमें आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में पंचायत में हुए निर्माण कार्य घटिया स्तर के थे। गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जिस पर उन्होंने इसकी शिकायत सरकार से कर ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाले वह पहले सरपंच हैं। सरपंच भवानीशंकर मालव ने राज्यभर के सरपंचों व सरपंच संघ के अध्यक्षों से इस पहल को आंदोलन मानते हुए जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज के परिप्रेक्ष्य में ग्राम पंचायतों को अपने कार्यों चाहे वह निर्माण कार्य हो या न्याय क्षेत्र व समझाइश के कार्य हो करने के लिए स्वतंत्र है।
पिछले 10 सालों से ठेकेदारी प्रथा ने ग्राम पंचायतों के अधिकारों व गांधीजी की स्वराज की कल्पना को झटका दिया है। सारे निर्माण कार्य ठेकेदारों के माध्यम से करा कर सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी को पंगु बना दिया है। 50 प्रतिशत महिलाएं सरपंच रहती हैं। वहां ठेकेदार ही आधिपत्य जमा लेते हैं। जिससे पंचायतों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता समाप्त हो गई है। सरपंच मालव ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री व पंचायत राज मंत्री को पत्र लिखकर ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करवाने की मांग की है।
ऑनलाइन परीक्षा या विद्यार्थियों का बीमा कराया जाए
थिंक इंडिया के पूर्व प्रदेश संयोजक शिवम विजयवर्गीय ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल को पत्र लिख कर विद्यार्थियों के करियर को देखते हुए ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित करवाने की मांग की है। उन्होंने जिन विद्यार्थियों के पास ऑनलाइन परीक्षाओं के साधन नहीं है, उन्हें चिन्हित कर उनके शहरों में ही परीक्षाएं करवाने की मांग की। साथ ही ऑफलाइन परीक्षा कराने पर हजारों विद्यार्थियों के संक्रमित होने का खतरा है।
ऐसे में परीक्षा समय सारिणी से पूर्व परीक्षार्थियों का बीमा करवाने की मांग की। उन्होंने पिछले दिनों आई यूजीसी की गाइडलाइन में सुधार करते हुए ऑनलाइन परीक्षा कराने की मांग की।
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