पॉपलीन में ख्याति प्राप्त करने के बाद अब वायरस रोधी कपड़ा तैयार करने में लगे उद्यमी

काेराेनाकाल के बाद कपड़ा इंडस्ट्री ने बदलाव शुरू कर दिए हैं। अब एक ऐसा केमिकल इजाद कर लिया गया है, जाे प्रोसेस करने पर कपड़ा तीन माह के लिए बैक्टीरिया मुक्त हाे जाता है। बालोतरा के शैलजा प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में इस तरह की टेस्टिंग कर कपड़ा बनाने का काम शुरू किया गया है। खास बात यह कि यह केमिकल किसी भी तरह से हानिकारक नहीं हाेने का दावा किया जा रहा है।

कोरोना वायरस से परेशान दुनिया व देश के बीच एक केमिकल इंजीनियर ने वायरस रोधी रसायन तैयार किया है। इससे तैयार कपड़े के संपर्क में आने पर वायरस नष्ट होगा। देश की रसायन प्रयोगशालाओं में जांच के बाद केमिकल खरा उतरा है। अब शीघ्र ही इससे तैयार कपड़ा बाजार में उतारा जाएगा।

उद्यमी दिनेश दिग्गा ने बालोतरा शहर में इस तरह का कपड़ा बनाने का कार्य शुरू किया है। इस तरह का काम बालोतरा में हर फैक्ट्री में शुरू करने को लेकर उन्होंने नरेश ढेलड़िया के साथ विधायक मदन प्रजापत से मिलकर सरकार से तरफ से मदद करने की बात कही।

उद्यमी दिग्गा ने बताया कि केमिकल को पीजी स्पेशलाइजेशन इन नैनो साइज मेटेरियल केमिकल इक्यूलेशन निदेशक, स्टेलर नैनाकेम इंडस्ट्रीज झूंझुनू के रंजन शर्मा ने तैयार किया है। यह वायरस व्यक्ति की कोशिका की मूल आरएनए एवं डीएनए की मूल संरचना को अपनी जैनेटिक संरचना में बदल देता है। इसलिए इंसानों के लिए उसके कवच के रूप में कपड़ों काे ही सुरक्षित बनाना आसान था। इसलिए सबसे पहले इस केमिकल काे कपड़ों पर प्रोसेस कराया, जाे सफल रहा।

केमिकल काे झुंझुनूं की स्टेलर नैनो कैम इंडस्ट्रीज में नैनाे टेक्नोलॉजी का उपयोग कर तैयार किया गया। राजस्थान में इस केमिकल काे कपड़े पर प्रोसेस करने की शुरुआत एलएनजे ग्रुप कर रहा है। इस पर हाेने वाला केमिकल प्रोसेस 30 धुलाई तक एक्टिव रहता है।

पीवी फेब्रिक पर केमिकल का असर ज्यादा देर तक टिकता है। इसलिए इस कपड़े से मास्क भी बनाए जा सकते हैं। अभी बैक्टीरिया से बचने के लिए सिर्फ पीपीई किट का ही नाम आता है। एक ताे यह बहुत महंगा हाेता है दूसरा इसे हर जगह नहीं पहना जा सकता है, इसलिए बैक्टीरिया फ्री कपड़ा काफी कारगर हाे सकता है। अभी कपड़ा बनने के बाद 180 डिग्री के तापमान पर 30 सैकंड तक केमिकल के साथ एंटी बैक्टीरियल बनाए जाने का काम किया जा रहा है।

प्रयोगशाला जांच में खरा उतरा एस-2317 केमिकल
नए शाेध से तैयार किए गए रसायन एस-2317 की जांच मुंबई की बायोटैक टेस्टिंग सर्विस व गुड़गांव में जांच करवाई गई। इसमें इस रसायन से तैयार किए कॉटन, पॉलिस्टर, रियो कपड़ा जांच बाद 99 प्रतिशत बैक्टीरिया व 97 प्रतिशत विषाणु रोधक होना पाया गया। देश के गुड़गांव में टीयूवी रिइलैंड व मुंबई की बायोटैक टेस्टिंग सर्विस की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में इस रसायन की जांच करवाई गई।

पॉपलीन के बाद वायरस रोधी कपड़ा बनाने में होड़

बालोतरा का पॉपलीन वस्त्र कारोबार की देश में अधिक डिमांड रहती है। पॉपलीन कारोबार में ख्याति प्राप्त करने के बाद अब यहां के उद्यमी वायरस रोधी कपड़ा बनाने में रुचि दिखा रहे हैं। शैलजा प्रिंट में कपड़ा तैयार होने के साथ ही अब अन्य उद्यमी भी इसी की तरह पर वायरस रोधी कपड़ा बनाने में रुचि ले रहे हैं। इस पर शीघ्र ही बालोतरा पॉपलीन के बाद वायरस रोधी कपड़ा बनाने में ख्याति प्राप्त करेगा।

  • वायरस रोधी कपड़ा बनाने के लिए रसायन आने के बाद काफी उद्यमी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। सूरत सहित अन्य जगहों पर इस तरह के कॉटन कपड़े से पीपीई किट भी बनने शुरू हो गए हैं। इससे ज्यादा गर्मी व पसीना वगैरा नहीं आए। बालोतरा आने वाले समय में इस तरह के कपड़े बनाकर पोपलीन की तरह देश में ख्याति प्राप्त करेगा। - नरेश ढेलड़िया, युवा उद्यमी
  • देश की बड़ी प्रयोगशालाओं में नए रसायन से तैयार कपड़ा जांच बाद विषाणु-जीवाणु रोधी पाया गया है। सरकार स्वयं के स्तर पर इसकी प्रामाणिकता करवाएं। संक्रमण से अप्रभावित कपड़ा मेडिकल, सेना, पुलिस व आमजन के लिए वरदान साबित होगा। वायरस रोधी केमिकल आने के बाद बालोतरा सहित बांसवाड़ा, सूरत, भीलवाड़ा के उद्यमी, ऐसे कपड़े बनाने में रुचि ले रहे हैं। - दिनेश दिग्गा, संचालक शैलजा प्रिंट प्राईवेट लिमिटेड, बालोतरा


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वायरस रोधी कपड़ा विधायक को दिखाते उद्यमी।


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