राजभवन में मंत्री विधायकों के नारे-तानाशाही नहीं चलेगी, राज्यपाल ने कहा-राजभवन घेरेंगे तो हमारी सुरक्षा का क्या
राजभवन में शुक्रवार को कांग्रेस के गहलोत समर्थक विधायक-शक्ति प्रदर्शन के लिए अपराह्न 2:41 बजे पहुंचे। सीएम गहलोत राज्यपाल से मिलने अंदर गए तो विधायक सोशल डिस्टेंसिंग के साथ राजभवन के बगीचे में धरने पर बैठ गए। विधायकों की नारेबाजी का शोर बाहर सड़क तक सुनाई दे रहा था।
राज्यपाल कलराज मिश्र विधायकों के बीच पहुंचे और उन्हें डांट लगाते हुए बोले- ये राजभवन है, यहां नारेबाजी क्यों की जा रही है। हमने सिर्फ आपको अंदर आने की अनुमति दी है। इसके बाद गहलोत को वे अपने साथ रेस्ट हाउस में ले गए और विधायक बाहर बगीचे में ही नारेबाजी करते रहे। वे राज्यपाल के निर्णय का इंतजार कर रहे थे। गहलोत जैसे ही विधायकों के बीच आकर बैठे कुछ देर बाद रामधुनी शुरू हो गई। चिड़ियों की चहचहाहट के बीच रघुपति राघव राजाराम... के स्वर वातावरण में गुंजायमान होने लगे।
अंदर चर्चा, बगीचे में शोर और नारेबाजी
दोपहर 2:41 बजे के करीब 4 बसों में सवार सीएम गहलोत और उनके विधायक राजभवन पहुंचे। बगीचे में बैठे विधायकों ने नारेबाजी की- ‘तानाशाही नहीं चलेगी’... ‘जोर-जुल्म की टक्कर में इंसाफ हमारा नारा है।’ इसके बाद अशोक गहलोत जिंदाबाद और गहलोत तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं के नारे भी लगे।
नारों के बाद सीएम संगत में रामधुनी
राज्यपाल से मिलने के बाद गहलोत जैसे ही विधायकों के बीच आकर बैठे, कुछ देर बाद रामधुनी शुरू हो गई। रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम... 3 दिन पहले भी पायलट पर निशाना साधने के बाद गहलोत ने 3 बार सत्यमेव जयते बोला था।
अंत में साथ गाया- हम होंगे कामयाब
विधायकों ने होटल के बाद राजभवन में भी कामयाबी के लिए सुर साधे। राजभवन में चले सत्याग्रह में एक बार फिर यह गीत गूंजा- हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन। मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास। हम होंगे कामयाब एक दिन।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, बयान और लॉ एंड ऑर्डर पर जवाब मांगा
राजभवन पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहा कि अगर जनता राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी। गहलोत के इस बयान को राज्यपाल कलराज मिश्र ने बेहद गंभीरता से लिया है।
इसको लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा हैं, जिसमें कहा है कि मैंने राजनीतिक जीवन में किसी भी सीएम का ऐसा वक्तव्य नहीं सुना। साथ ही उन्होंने शुक्रवार को राजभवन में
हुए पूरे घटनाक्रम पर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। उन्होंने यह भी राज्यपाल आवास के अंदर धरना देने को भी गलत ठहराया।
- सीएम के सार्वजनिक बयान पर पूछना चाहता हूं कि अगर आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकता है ताे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के संबंध में आपका क्या मंतव्य है?
- साथ-साथ ये भी बताएं कि क्या राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क करें?
- राज्यपाल ने पत्र में कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन में इस तरह से किसी भी मुख्यमंत्री का वक्तव्य नहीं सुना है।
- विधायकाें द्वारा राज्यपाल के आवास के अंदर धरना देना गलत परम्परा और दबाव की राजनीति की शुरुआत ताे नहीं है।
- मीडिया में देखा कि आपने संवैधानिक अनुराेध और लिए जाने वाले संवैधानिक निर्णय दाेनाे काे राजनैतिक रंग देने का कार्य किया है। इससे मैं दुखी और आहत हूं।
- काेई भी पत्र आपकी ओर से आता है ताे मुझे संविधान सम्मत निर्णय लेना ही हाेता है। इसका अधिकार भारतीय संविधान से मुझे मिला है। आपकी विधानसभा सत्र बुलाने की अनुशंसा मुझे 23 जुलाई काे प्रेषित की गई, अभी और विशेषज्ञों से चर्चा कर पाऊं, उससे पहले ही आपने ‘राजभवन घेराव होता है तो मेरी जिम्मेदारी नहीं’ ऐसा बयान दे दिया।
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