मंत्री के बेटे को रोकने वाली कांस्टेबल सुनीता यादव अभी तनाव में, वकील बनेगी या करेगी पत्रकारिता

लॉयन न्यूज़, बीकानेर। गुजरात की पुलिस कांस्टेबल सुनीता यादव का एक वीडियो बीते दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ, जिसमें वह मंत्री के बेटे को कानून के बारे में बताती दिख रही हैं। दरअसल मंत्री के बेटे ने 8 जुलाई की रात कोरोना वायरस कर्फ्यू का उल्लंघन किया था। अब सुनीता का वीडियो देख लोग उन्हें लेडी सिंघम कह रहे हैं। हालांकि सुनीता का कहना है कि वो लेडी सिंघम नहीं हैं बल्कि एलआर अधिकारी (लोक रक्षक दल) हैं।
‘मैं लेडी सिंघम नहीं हूं’
एक वेबसाइट से बातचीत में सुनीता कहती हैं, ‘मैं लेडी सिंघम नहीं हूं। मैं एक आम एलआर अधिकारी (लोक रक्षक दल) हूं। मैंने केवल अपनी ड्यूटी निभाई। लोगों ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अधिकतर पुलिसकर्मी ऐसा नहीं करते हैं। लेकिन अच्छा लगता है जब लोग ऐसा कहते हैं।’ सुनीता ने कहा, ‘पहले मैंने सोचा था कि शक्ति खाकी (पुलिस की वर्दी) में निहित है। लेकिन इस घटना ने मुझे बता दिया कि शक्ति (पावर) रैंक में निहित है। तो मैं ढ्ढक्कस् की तैयारी करना चाहती हूं। मैं एक रैंक के साथ लौटना चाहती हूं। इस मुद्दे को आसानी से सुलझाया जा सकता था। लेकिन इसे च्वींगम की तरह खींचा गया क्योंकि मेरे पास कोई रैंक नहीं है।’

जरूरी कामों के लिए निकलना मना नहीं
इस घटना के बारे में बात करते हुए सुनीता यादव ने कहा कि इस दौरान कुछ लोग कर्फ्यू के दौरान भी वाहन से जा रहे थे। जिसके कारण उन्होंने इन लोगों को रोककर पूछा कि कर्फ्यू में बाहर निकलने का क्या कारण है। वह कहती हैं, ‘जरूरी कामों के लिए कर्फ्यू में निकलना मना नहीं है। तो उन्होंने मुझसे माफी मांगी। तो मैंने उन्हें बिना सोचे-समझे जाने देने का सोचा लेकिन कानून के अनुसार मुझे कुछ करना था। मेरे पास चालान की स्लिप नहीं थी। तो मुझे लगा कि कानून के उल्लंघन के लिए कुछ सिटअप्स पर्याप्त होंगे।’

मंत्री के बेटे से बहस के बाद मिलीं धमकी
सुनीता यादव से स्वास्थ्य राज्यमंत्री कानाणी के बेटे प्रकाश कानाणी की तीखी बहस हो गई थी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। इस मामले में कानाणी के बेटे प्रकाश कानाणी और उसके दोस्तों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। हालांकि इस घटना के बाद सुनीता को ‘धमकी’ भी मिलने लगी थीं। उन्हें प्रोटेक्शन दी गई और ट्रांसफर भी किया गया। इसके बाद सुनीता ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन ये अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनका इस्तीफा मंजूर हुआ है या नहीं।

‘इसके लिए लोग जिम्मेदार हैं’
सुनीता का कहना है, ‘पांच लोग रात में कर्फ्यू के वक्त 10.30-11.00 बजे के करीब बाहर घूम रहे थे। वो मिना मास्क के थे। मैंने उन्हें रोका और बाहर निकलने का कारण पूछा। मंत्री का बेटा आया। इसके लिए लोग जिम्मेदार हैं क्योंकि हम इनसे वीवीआईपी की तरह व्यवहार करते हैं।’ आईपीएस बनने की तैयारी को लेकर उन्होंने कहा, ‘अभी मैं बहुत तनाव में हूं और कुछ सोच नहीं पा रही हूं। पहले भी मैं आईपीएस बनना चाहती थी। मैं एक आर्मी ऑफिसर बनना चाहती थी लेकिन कुछ कारणों से नहीं बन पाई।’ सुनीता ने कहा कि अगर वह आईपीएस बनने के लिए सिविल परीक्षा पास नहीं कर पाती हैं तो एलएलबी में हाथ आजमाएंगी या फिर पत्रकारिता में करियर बनाएंगी।

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