(संदीप शर्मा) 400 से अधिक निजी अस्पतालों में हर साल तीन लाख से अधिक इलाज लेने वाले भामाशाह कार्ड धारकों को अभी इलाज नहीं मिल पाएगा। वजह है निजी अस्पतालों की ओर से भामाशाह के तहत इलाज के लिए मना कर देना। इसकी तीन प्रमुख वजह बताई है।
क्लीनिकल स्टेबलिश एक्ट में पंजीयन कराना, पुराना भुगतान जल्दी कराना और निजी-सरकारी अस्पताल में भेदभाव नहीं करना शामिल हैं। वहीं सरकार ने अभी तक किसी भी नई कंपनी को टेंडर नहीं दिया है। ऐसे में अस्पतालों में पिछले चार महीनों से इलाज इलाज नहीं किया जा रहा है।
निजी अस्पतालों ने इसलिए किया मना
सरकार ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी निजी अस्पताल अब तभी आयुष्मान भारत महात्मा गांधी स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज कर सकेगा। जब वे क्लीनिकल स्टेबलिश एक्ट के तहत पंजीयन करा लेगा। प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम साेसायटी का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों को क्लीनिकल स्टेबलिश एक्ट में छूट दी गई है तो केवल निजी अस्पतालों पर मनमानी क्यों चलाई जा रही है।
पहले तो मेहरबानी कर ही दी थी
नई कंपनी के लिए चिकित्सा विभाग ने टेंडर जारी किया है, लेकिन अभी कीमतों को लेकर कंपनियों ने रूचि नहीं दिखाई है। ऐसे में जल्दी ही इस पर निर्णय हो पाएगा, यह संदेह ही है। हालांकि कुछ समय पूर्व एक ही कंपनी पर मेहरबानी करते हुए इस काम की जिम्मेदारी देने की तैयारी कर ली गई थी।
तो अस्पतालों को कौन करेगा भुगतान
न केवल निजी बल्कि सरकारी अस्पतालों की पुरानी कंपनी से लेनदारी बनती है। करोड़ों का इलाज करने के बावजूद कंपनी ने अस्पतालों को पैसा नहीं दिया। अस्पतालों ने कहा है कि यदि उन्हें यह पैसा नहीं मिला तो काम करना काफी मुश्किल होगा।
वार्ता करें, सही निर्णय लें, इसके बाद, ही अस्पताल इलाज के लिए तैयार होंगे
क्लीनिकल स्टेबलिश एक्ट हो या इलाज का पैसा नहीं मिलना। जिस तरह का दबाव है, उन परिस्थितियों में निजी अस्पताल इलाज नहीं कर सकते। जो किया जा रहा है, उससे इंस्पेक्टर राज पनपेगा। पहले सरकार अस्पतालों की सुने, वार्ता करे और सही निर्णय ले, इसके बाद ही अस्पताल इलाज के लिए तैयार होंगे।
- डॉ. विजय कपूर, सेक्रेट्री, पीएचएनएस
जो समस्या है, उसे खत्म करेंगे
मामला जानकारी में है, जल्दी ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएंगी। जो भी समस्या है, उसे खत्म कर लिया जाएगा।
- रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री
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