बस मालिकाें पर आर्थिक संकट, 80% बसें सरेंडर करना चाहते हैं मालिक, 25 तो कबाड़ में कटवा दी

काेराेना के कारण लगाया गया लॉकडाउन खत्म हो गया, लेकिन प्राइवेट बसाें की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। काेराेना के चलते लाेग बसाें में सफर करने से बच रहे हैं। लाॅकडाउन के पहले जहां काेटा से प्रतिदिन 64 स्लीपर काेच और 142 लाेकल बसें चलती थीं, आज 15 स्लीपर काेच और 22 लाेकल बसें ही चल रही हैं। उसमें भी सवारियां 15 से 20 प्रतिशत ही मिल पा रही हैं।

कई-कई दिन ताे डीजल का पैसा तक नहीं निकल पा रहा है। खड़ी बसाें पर लग रहे टैक्स ने परेशानी और बढ़ा दी है। ऐसे में बस मालिक अपनी 80 प्रतिशत बसाें काे चलाने की बजाय परिवहन विभाग में सरेंडर का आवेदन दे चुके हैं, लेकिन परिवहन विभाग ने बसाें काे सरेंडर करने से मना कर दिया। हालात बिगड़ते देख काेटा बस मालिक संघ के 4 पदाधिकारी ताे अपनी 25 बसाें काे कबाड़ में कटवा चुके हैं।

बसाें काे बेचना चाह रहे मालिक, अभी खरीदार नहीं मिल रहे
बस मालिक संघ के अध्यक्ष सत्यनारायण साहू का कहना है कि हमारे संघ के चार पदाधिकारियाें ने ताे 25 गाड़ियाें काे कबाड़ में कटवा दिया है। काेटा में लाॅकडाउन के पहले 250 बसें चल रही थीं। अब 22 बसें ही चल रही हैं और उसमें भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। 80 प्रतिशत साथी आरसी सरेंडर करना चाहते हैं ताकि टैक्स नहीं लगे। जब यात्री मिलने लगेंगे ताे वापस ले लेंगे, लेकिन परिवहन विभाग ने इसके लिए भी मना कर दिया।

प्राइवेट बस ट्रैवल्स एसाेसिएशन के उपाध्यक्ष अशाेक चांदना का कहना है कि कई बस मालिक बसें बेचकर दूसरा काराेबार करने की साेच रहे हैं, लेकिन इस दाैर में बसें भी नहीं बिक रही। काेटा से प्रतिदिन 64 बसें ताे प्रमुख रूट पर चलती थी। आज 15 बसें चला रखी है, उनमें भी यात्री नहीं है। यात्रियाें के लिए सभी सुविधाएं कर रहे हैं। बस काे सेनेटाइज किया जा रहा है, हर यात्री काे मास्क और सेनेटाइजर दिया जा रहा है। उसके बावजूद लाेग बसाें में यात्रा नहीं कर रहे हैं।

यात्री भार नहीं मिलने के कारण बसाें की आरसी सरेंडर करने का काेई आदेश नहीं है। नियमाें में भी यह नहीं लिखा कि यात्री नहीं मिलने पर आरसी सरेंडर की जा सकती है। आरसी सरेंडर करने के लिए बस की बाॅडी या इंजन में खराबी हाेना आवश्यक है। -कुसुम राठाैड़, आरटीओ



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