भाई-बहन का सबसे बड़ा पर्व रक्षाबंधन 3 अगस्त को है। इस बार रक्षाबंधन किसानों के लिए अच्छा संदेश लेकर आया है। सावन मास की पूर्णिमा को सुबह 7.18 बजे बाद सर्वार्थ सिद्धि योग, सोमवती अमावस्या, प्रीति योग, सूर्य-शनि के समसत्तक योग, मकर का चंद्रमा व श्रवण नक्षत्र जैसे 6 विशेष योग बन रहे हैं। ये योग अंतिम बार वर्ष 1991 में बने थे। 29 साल बाद बन रहे इस योग से कृषि क्षेत्र को विशेष लाभ होगा। किसानों के खेतों में भरपूर फसल होगी। यह कहना है ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा का।
वे बताते हैं कि इस 6 योग के विशेष संयोग से कोरोना जैसी महामारी से उपजे आर्थिक संकट में किसानों को राहत मिलेगी। अच्छी फसल होने से उन्हें आर्थिक लाभ होगा, देश व राज्य में विकास की गति आगे बढ़ेगी। वहीं बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना व खुद की रक्षा के लिए भाइयों की कलाई पर राखी बांधेगी। रक्षाबंधन पर सुबह 9.28 बजे तक भद्रा है। 9.29 बजे के बाद बहनें राखी बांध सकेंगी। श्रावणी व फाल्गुनी दोनों भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं। श्रावणी भद्रा में कार्य करने से राजा का व फाल्गुनी भद्रा में प्रजा का अनिष्ट होता है।
मछुआरों का नया वर्ष रक्षाबंधन से ही शुरू होता है
मन्नासा के मुताबिक, समुद्री पदार्थों का व्यापार करने वाले मछुआरों आदि का नया वर्ष रक्षाबंधन से ही शुरू होता है। इस दिन वे अपने व्यापार को फिर शुरू करने की रस्म निभाते हैं। सोमवार को इस बार रक्षाबंधन शुभ संकेत की ओर इशारा कर रहा है।
इंद्राणी ने दी थी इंद्र को ब्राह्मणों से रक्षा सूत्र बंधवाकर युद्ध करने की सलाह
बकौल ज्योतिर्विद मन्नासा, रक्षाबंधन हर बुरे योग को भी बदलने की क्षमता रखता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। प्राचीनकाल में देवताओं व असुरों के बीच युद्ध हुआ। असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया और देवताओं को वहां से निकाल दिया।
चिंतित, पराजित व दुखी देवता अपने गुरु बृहस्पति के पास गए। उन्हें पीड़ा सुनाई। इसे वहां उपस्थित इंद्राणी ने सुन लिया। उन्होंने इंद्र को कहा कि कल सावन मास की पूर्णिमा है। मैं अपने हाथों से विधिपूर्वक रक्षा सूत्र तैयार करूंगी। उसे आप स्वस्ति वाचन कर ब्राह्मणों से बंधवाकर युद्ध के लिए जाना। आपकी किसी भी स्थिति में पराजय नहीं होगी। इंद्रादि देवताओं ने एेसा ही किया और वे युद्ध में विजयी हुए। तब से रक्षाबंधन मनाया जा रहा है।
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