तलवण्डी स्थित गुलाटी फिजियोथैरेपी एवं पैन रिलीफ सेंटर पर अटरू निवासी 60 साल की महिला कस्तूरी बाई डाॅ. विनय गुलाटी के यहां पर घिसटते हुए आई थी। जब डाॅ. विनय गुलाटी ने महिला को देखा तो पाया कि वह जमीन पर घिसटते हुए दिखाने आई है। महिला ने डाॅ. गुलाटी काे बताया कि वह ढाई साल से परेशान है। 17 महीने पहले बाइक एक्सीडेन्ट से दोनों घुटनों के एसीएल लिगामेंट पार्शियल टियर हो चुके है।
रीढ की हड्डी का छल्ला भी खिसक गया था। नसों के दबाव से दोनों पैरों में खड़े होने की ताकत समाप्त हो चुकी थी। जांच पर पता चला कि दायें पैर का पंजा भी उठाने में असमर्थ थी। एमआरआई देखी तो पता चला कि डाॅक्टर ने दोनों लिगामेंट टूटने पर सर्जरी की सलाह दी थी, लेकिन मरीज गरीब होने की वजह से आपरेशन कराए बिना ही अस्पताल से लाैट गया था।
डाॅक्टर गुलाटी ने एमआरआई रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि बिना आपरेशन के महिला का उपचार संभव है। महिला पैराें पर खड़ी हाे सकती है। महिला का नी बेरस, दुबई से मंगवाई आईपीएमएस मशीन, रशिया से आई स्केनर मशीन आदि से साउथ अफ्रीकन डाई निडलिंग तकनीक से उपाचार किया तो ना सिर्फ वाकर से अपने आप खड़े होने लगी, अपितु अपने ही पैरो पर वाकर के सहारे चलने-फिरने लगी।
डाॅक्टर विनय गुलाटी की सलाह है कि फिजियोथैरेपी ऐसा माध्यम से जिससे आप पुराने से पुराने दर्द से निजात पा सकते हैं। परंतु कई मरीज इलाज में जल्दबाजी करने के कारण या दवाई गोलियों पर निर्भर रहने के कारण ठीक नहीं हो पाते।
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