नागौर के 44 गांवों में तैयार हो रही है टिड्डी की नई पीढ़ी, इस सीजन में 110 से अधिक बार कर चुकी हैं हमला

10 से 14 दिन पहले पड़ाव डाल अंडे दे चुकी रेगिस्तानी टिड्डी के बच्चे (फाका) जमीन पर रेंगने लगे है। प्रजनन काल में टिड्डी की तैयार हो रही नई पीढ़ी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विभाग जिले में 44 गांवों में शिशु टिड्डी (फाका) की ट्रैकिंग कर स्थान चिंह्नित किए है। जिसमें से ब्रिडिंग 4 जगह जायल के मांगलोद, ऐवाद, मूंडवा के पालड़ी पिचकिया, परबतसर के धोलिया गांव में अंडों से निकलने के बाद पंखहीन काले व सफेद शिशु टिड्डी वनस्पतियों, पेड़-पौधों की तलाश में लाखों की संख्या में जमीन की सतह पर चलने लगे हैं।

शुरुआात में काले रंगे के होते हैं और बाद में पीला हो जाता है। कृषि अधिकारी शंकर राम सियाक बताते है कि चारों जगहों पर विभागों की टीमों ने रेंगते फाका पर नियंत्रण पा लिया है। बाकी चिंह्नित स्थानों पर नजर बनाए हुए हैं।
अलर्ट : जिले में जिन स्थानों पर टिड्डी अंडे दे चुकी हैं और फाका जमीन पर रेंगने लगा है तो किसान नियंत्रण के लिए संबंधित पर्यवेक्षक या कृषि अधिकारियों को सूचना दें।

उपाय : जहां फाका तैयार हो रहा है, वहां किसान गहरी खाई खोद दें, ताकि फाका फसलों न पहुंचकर आवाज के साथ खाई में गिर जाए। उसके बाद जला दें या दफना दें।

खतरा : जिले के मेड़ता, डीडवाना, डेगाना, गोटन, मूंडवा सहित अन्य जगहों पर पड़ाव डाल चुकी टिड्डियां अंडे दे चुकी है, जिससे सर्वाधिक फाका तैयार हो रहा है।

राहत : जहां-जहां टिड्डी अंडे दे चुकी है, उन 44 स्थानों पर कृषि विभाग चिंह्नित कर चुका है। मादा टिड्डी पर नियंत्रण पाकर जमीन में उनके दिए अंडों से बाहर निकलने वाले शिशु टिड्डी को जमीन पर रेंगते हुए का खात्मा करने में जुटा है।

नॉलेज : एक रेगिस्तानी मादा टिड्डी तीन बार अंडे दे सकती है। एक बार में वह 80 से 120 अंडे देती हैं। इनका जीवनकाल 3 से 5 महीनों का होता है। पहले प्रजनन काल में टिड्डियां 20 गुना, दूसरे में 400 और तीसरे में 1,600 गुना तक बढ़ जाती हैं।



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मांगलोद में एक टिड्डी के दिए अंडे, इनसे निकला नीचे यह फाका है।


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