पशुओं के बन रहे आधार कार्ड, 400 कर्मचारी 11 लाख गाय-भैंसों पर कर रहे टैगिंग, अब तक 1.40 लाख पर हुआ काम

अब तक इंसानों के आधार कार्ड बनते आए हैं, अब पशु पालन विभाग गाय-भैंसों के भी अाधार कार्ड तैयार कर रहा है। यह काम इन्फार्मेशन नेटवर्क फाॅर एनिमल प्रॉडक्टिविटी एंड हैल्थ (इनाफ) याेजना के तहत हो रहा है। 12 डिजिट का यह आधार कार्ड टैगिंग के रूप में पशुओं पर लगेगा और इनाफ सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी हाेगा।

विभाग के 400 कर्मचारियाें ने अब तक जिले के 11 लाख में से 1.40 लाख पशुओं का टैगिंग यानी आधार कार्ड तैयार कर लिया है। इस आधार कार्ड से पशु पालक घर बैठे अपने पशु के बारे में साॅफ्टवेयर के जरिए जानकारी ले सकेंगे और टीकाकरण, नस्ल सुधार कार्यक्रम, चिकित्सा सहायता सहित अन्य काम आसानी से हाे पाएंगे।

चार साल से ज्यादा उम्र के पशुओं पर ही की जा रही है यह टैगिंग

यह टैगिंग चार साल से ज्यादा उम्र के पशुओं में किया जा रहा है। जिले में पशुओं का विस्तृत डेटाबेस तैयार करने के लिए कर्मचारियाें का दल बनाकर टैगिंग की शुरुआत की। कर्मचारी डाेर टू डाेर जाकर हर टैगिंग और रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पहचान सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे उन्नत नस्ल के पशुओं का संरक्षण-संवर्धन हो सकेगा। पशुओंमें चिकित्सा, टीकाकरण, नाकारा सांड और बांझ पशु रिकाॅर्ड संधारण में आसानी हाेगी।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से कर्मचारी माैके पर ही तैयार कर रहे हैं डेटा

इस काम में लगे हर कर्मचारी काे टैबलेट दिया हुआ है। इनाफ साॅफ्टवेयर में पशु नस्ल, उम्र, टीका कब लगा, काेई बीमारी ताे नहीं, पशु पालक का नाम, पता आदि जानकारी हाेगी। इससे राज्य सरकार की याेजनाओं से भी सीधा लाभ मिल पाएगा। साथ ही ऑनलाइन जानकारी से घर बैठे पशुओं का क्रय-विक्रय भी हाे सकेगा।

ऐसे भी मदद मिली

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. भूपेन्द्र भारद्वाज ने बताया कि पशुओं की जानकारी से टीकाकरण, नस्ल सुधार आदि सहायता ताे मिलेगी ही, पशु चाेरी के मामले में भी मदद मिल पाएगी। जैसे कुछ दिनाें पहले एक गांव में पशुपालक की भैंस चाेरी हुई। चाेर दूसरे गांव में छाेड़कर भाग गया।

पुलिस ने टैग देखकर विभाग के कर्मचारी को बुलाया। कर्मचारी ने तुरंत ऑनलाइन जानकारी देख पशुपालक का पता लगा लिया। याेजना प्रभारी डाॅ. शक्ति सिंह ने बताया कि जिले में करीब 14 लाख गाय-भैंसें हैं। इनमें से करीब 11 लाख का डेटाबेस तैयार करना है। इसमें 1.40 लाख की टैगिंग हाे चुकी है, जिनमें से एक लाख का रजिस्ट्रेशन भी कर लिया है।



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